
SP MLA On Dhurandhar 2 Controversy (सोर्स- एक्स)
SP MLA On Dhurandhar 2 Controversy: बॉलीवुड फिल्मों को अक्सर समाज का आईना कहा जाता है, लेकिन जब यही सिनेमा विवादों के घेरे में आ जाए तो बहस और तेज हो जाती है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ को लेकर भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। फिल्म जहां एक तरफ बॉक्स ऑफिस पर चर्चा में है, वहीं दूसरी तरफ इसके कंटेंट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
समाजवादी पार्टी के विधायक अब्दुल आजमी ने फिल्म पर तीखा हमला बोलते हुए इसे झूठ पर आधारित और नफरत फैलाने वाली फिल्म करार दिाया है। उनका कहना है कि फिल्म की कहानी पाकिस्तान से जुड़ी हुई दिखाई गई है, ऐसे में सवाल उठता है कि इसे भारत के दर्शकों के सामने क्यों पेश किया जा रहा है। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।
अबु आजमी का आरोप है कि फिल्म में एक खास समुदाय को निशाना बनाते हुए अपराधों को चुनिंदा तरीके से दिखाया गया है। उनका मानना है कि इस तरह की फिल्में समाज में गलत संदेश देती हैं और लोगों के बीच दूरी बढ़ाने का काम करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सिनेमा का मकसद मनोरंजन होना चाहिए, न कि किसी तरह का एजेंडा फैलाना।
इसी मुद्दे पर सपा के एक दूसरे नेता रईस शेख ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने फिल्म को कला के बजाय प्रचार का माध्यम बताया और कहा कि इस तरह की फिल्में कहानी और सियासत के बीच की रेखा को धुंधला कर देती हैं। उनके मुताबिक, जब सिनेमा किसी खास विचारधारा को बढ़ावा देने लगे, तो उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी है।
वहीं, वारिस पठान ने भी फिल्म के कंटेंट पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि फिल्में समाज को जोड़ने का काम करती हैं, लेकिन अगर उनमें नकारात्मकता या किसी समुदाय के खिलाफ मैसेज हो, तो यह समाज के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ फिल्में केवल मुनाफा कमाने के लिए विवादास्पद विषयों को उठाती हैं।
‘धुरंधर 2’ के खिलाफ उठ रही आवाजें ये संकेत देती हैं कि फिल्म सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि अब यह सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा भी बन चुकी है। हालांकि, फिल्म के समर्थकों का मानना है कि यह सिर्फ एक काल्पनिक कहानी है और इसे उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।
ये पहली बार नहीं है जब किसी फिल्म को लेकर इस तरह का विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी कई फिल्मों पर धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक आधार पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में यह बहस एक बार फिर सामने आई है कि सिनेमा की सीमाएं क्या होनी चाहिए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
फिलहाल ‘धुरंधर: द रिवेंज’ को लेकर जारी ये विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर किसी बड़े फैसले की ओर बढ़ता है।
Updated on:
20 Mar 2026 04:51 pm
Published on:
20 Mar 2026 04:36 pm
बड़ी खबरें
View Allबॉलीवुड
मनोरंजन
ट्रेंडिंग
