पश्चिम बंगाल चुनाव में उम्मीदवारों का चौंकाने वाला रिपोर्ट कार्ड सामने आया है। कई प्रत्याशी करोड़पति हैं, तो कई पर हत्या और गंभीर अपराधों के आरोप हैं। ADR रिपोर्ट उम्मीदवारों से जुड़ी कई जानकारी सामने आई है।
Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की हलचल अब तेज हो चुकी है। 23 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग होनी है, वहीं 29 अप्रैल को दूसरे चरण किआ मतदान होना है। लेकिन उससे पहले ही चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों की एक दिलचस्प और कहीं-कहीं चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यह तस्वीर सामने आई है एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के रिपोर्ट से। हर चुनाव से पहले ADR उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामे के अनुसार संपत्ति। आपराधिक रिकॉर्ड का डेटा जारी करती है। आइए देखते हैं बंगाल चुनाव से पहले कि कितने प्रत्याशियों पर मुकदमे दर्ज है या किसकी कितनी संपत्ति है।
रिपोर्ट बताती है कि इस बार चुनाव लड़ रहे लगभग 23 प्रतिशत उम्मीदवारों ने खुद ही माना है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। यानी हर चार में से एक उम्मीदवार किसी न किसी केस से जुड़ा हुआ है। अगर बड़े दलों की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं। पार्टी के 70 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपने हलफनामे में आपराधिक केस होने की जानकारी दी है। वहीं तृणमूल कांग्रेस के 43 प्रतिशत, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के 44 प्रतिशत के आसपास और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भी कई उम्मीदवारों ने ऐसे मामलों का खुलासा किया है।
19 उम्मीदवारों पर हत्या के आरोप
105 पर हत्या की कोशिश
98 पर महिलाओं के खिलाफ अपराध
6 उम्मीदवारों पर बलात्कार जैसे गंभीर आरोप भी दर्ज हैं।
रिपोर्ट में 66 विधानसभा सीटों को 'रेड अलर्ट' माना गया है। इसका मतलब है कि इन सीटों पर तीन या उससे ज्यादा उम्मीदवार ऐसे हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले हैं। यह कुल सीटों का लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा है।
अब बात पैसे की। चुनावी मैदान में दौलत भी खूब दिखाई दे रही है। कुल 309 उम्मीदवार करोड़पति हैं, यानी लगभग 21 प्रतिशत। पहले चरण के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 1.34 करोड़ रुपये बताई गई है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार इस मामले में सबसे आगे हैं, जिनकी औसत संपत्ति करीब 5.70 करोड़ रुपये है। सबसे अमीर उम्मीदवार जंगीपुर सीट से जाकिर हुसैन हैं, जिनकी संपत्ति 133 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है। वहीं रुबिया बेगम, जिनके पास सिर्फ 500 रुपये की संपत्ति दर्ज है।
देश में महिला आरक्षण की चर्चा जोरों पर है, लेकिन इस चुनाव में तस्वीर कुछ और ही है। पहले चरण में सिर्फ 167 महिला उम्मीदवार मैदान में हैं, जो कुल का लगभग 11 प्रतिशत है। यह आंकड़ा सभी पार्टियों के उम्मीदवारों केर आधार पर निकला गया है।
पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे और आज प्रचार का आखिरी दिन है। इसी बीच दूसरे चरण को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने। इसमें दूसरे चरण के उम्मीदवारों की पूरी पड़ताल की गई है। दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान होना है, और इन सीटों पर कुल 1,445 उम्मीदवार मैदान में हैं।
रिपोर्ट की सबसे अहम बात यही है कि चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। करीब 23 प्रतिशत यानी 338 उम्मीदवारों ने खुद स्वीकार किया है कि उनके खिलाफ केस चल रहे हैं। यही नहीं, इनमें से 295 उम्मीदवारों पर गंभीर आरोप भी हैं। यानी मामला सिर्फ छोटे-मोटे विवादों का नहीं है।
कुछ आंकड़े तो सीधे चौंकाते हैं, 16 उम्मीदवारों पर हत्या के आरोप, 80 पर हत्या की कोशिश के आरोप हैं।
अगर दलों के हिसाब से देखें तो तस्वीर और साफ हो जाती है। भारतीय जनता पार्टी के सबसे ज्यादा उम्मीदवारों ने आपराधिक मामलों की जानकारी दी है, करीब 72 प्रतिशत। वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के 51 प्रतिशत, तृणमूल कांग्रेस के 35 प्रतिशत और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 26 प्रतिशत उम्मीदवारों ने भी अपने हलफनामे में केस दर्ज होने की बात कही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 142 में से 63 सीटों को 'रेड अलर्ट' कैटेगरी में रखा गया है। इन सीटों पर तीन या उससे ज्यादा उम्मीदवार ऐसे हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले हैं। यानी इन इलाकों में चुनावी मुकाबला थोड़ा ज्यादा संवेदनशील माना जा रहा है।
उम्मीदवारों के संपत्ति की बात करें तो 1,445 उम्मीदवारों में से 321 उम्मीदवार करोड़पति हैं, यानी लगभग 22 प्रतिशत। औसतन हर उम्मीदवार की संपत्ति 1.21 करोड़ रुपये है। लेकिन जब पार्टियों के हिसाब से देखें, तो फर्क साफ नजर आता है।
तृणमूल कांग्रेस: औसत संपत्ति 5.05 करोड़ रुपये
भारतीय जनता पार्टी: 3.28 करोड़ रुपये
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी: 1.22 करोड़ रुपये
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: 1.04 करोड़ रुपये