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बंगाल चुनाव से पहले मचा बवाल, एक बूथ के सभी मुस्लिम मतदाताओं के वोटर्स लिस्ट से हटे नाम

Bengal elections: बसिरहाट में एक बूथ से 340 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने से विवाद गहरा गया है। बीएलओ का नाम भी लिस्ट से गायब है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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Mar 26, 2026
CG Election news
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

Bengal elections: पश्चिम बंगाल के बसिरहाट नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सूची को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। यहां एक ही बूथ से बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाए जाने से स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है। इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में जारी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट में बूथ नंबर 5 के 340 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए, जिनमें सभी मुस्लिम समुदाय से बताए जा रहे हैं। सिर्फ मतदाताओं के ही नहीं बल्कि लिस्ट में से बिएलओ का नाम भी हटा दिया गया, जो कि मुस्लिम है।

सभी नामों को सीधे डिलीट कैटेगरी में डाला

बसिरहाट ब्लॉक II के बोरोगोबरा गांव स्थित बूथ नंबर 5 में कुल 992 पंजीकृत मतदाता थे। इनमें से 38 नाम सामान्य कारणों जैसे मृत्यु या स्थान परिवर्तन के चलते हटाए गए। हालांकि, 358 मतदाताओं को पात्रता जांच के लिए नोटिस भेजा गया था। ड्राफ्ट लिस्ट में 18 मामलों का समाधान हो गया, जबकि बाकी 340 को अंडर एडजुडिकेशन रखा गया। इसके बाद 23 तारीख को सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी की गई जिसमें इन सभी नामों को सीधे डिलीट कैटेगरी में डाल दिया गया, जिससे विवाद और गहरा गया।

बीएलओ का नाम भी लिस्ट से हटाया

इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब पता चला कि बूथ लेवल ऑफिसर मोहम्मद शफीउल आलम का नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। आलम ने बताया कि उन्होंने खुद सभी मतदाताओं के फॉर्म भरवाने और दस्तावेज अपलोड करने में मदद की थी, जो भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के नियमों के अनुसार सही थे। इसके बावजूद नाम हटाए जाने से स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। सैकड़ों लोगों ने आलम के घर और आसपास के इलाके में प्रदर्शन किया और इसे समुदाय विशेष को निशाना बनाने की कार्रवाई बताया।

तीन या चार दस्तावेज जमा कराने पर भी कटे नाम

प्रभावित मतदाताओं का कहना है कि चुनाव आयोग केवल एक वैध दस्तावेज की मांग करता है, जबकि कई लोगों ने तीन या चार दस्तावेज जमा किए थे। इसके बावजूद उनके नाम हटाए जाना समझ से परे है। स्थानीय निवासी काजिरुल मंडल ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है। वहीं, आलम ने बताया कि उन्होंने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर से संपर्क किया, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर से संपर्क भी नहीं हो सका। अब उन्होंने इस मामले को ट्रिब्यूनल में ले जाने की बात कही है।

Updated on:
26 Mar 2026 02:05 pm
Published on:
26 Mar 2026 02:05 pm