
Bharat Bhushan Tiwari encounter case: बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को इस मामले में पटना हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया।
यह याचिका प्रिया मिश्रा की तरफ से वकील नरेंद्र मिश्रा ने दायर की थी। याचिका में इस मामले की जांच CBI से कराने की मांग की गई थी। इसके अलावा, सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने, एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पीड़ित के परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग की गई थी।
बता दें कि भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह भी सुनवाई से इनकार कर दिया था। उस सुनवाई में भी अदालत ने याचिककार्ताओं से हाई कोर्ट जाने को कहा था। वकील विशाल तिवार की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया था कि भरत भूषण तिवारी का एनकाउंडर फर्जी था। याचिका में मामले की जांच सीबीआई से करने की मांग की थी।
भोजपुर के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच जारी है। ग्रामीण ललिता देवी और भरत के भाई चंदन मंगलवार को न्यायिक जांच अधिकारी के कार्यालय पहुंचे। उन्होंने वहां आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा के सामने अपनी बात रखी।
चंदन ने बताया कि आत्मसमर्पण के बावजूद पुलिस ने भरत को गोली मार दी थी। उन्होंने मांग की कि जल्द से जल्द पुलिस वालों को गिरफ्तार किया जाए और उन्हें फांसी की सजा दी जाए। वहीं प्रत्यक्षदर्शी महिला ललिता देवी ने कहा कि पुलिसकर्मी ने ही भरत तिवारी की हत्या की है। मैंने अपनी आखों से हत्या होते देखा था।
बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस ने इसे एनकाउंटर बताया।
पुलिस का दावा है कि भरत भूषण तिवारी हथियारबंद थे। उन्हें पकड़ने की कोशिश के दौरान मुठभेड़ हुई, जिसमें उनकी मौत हो गई। वहीं, परिजनों और समर्थकों का आरोप है कि यह फर्जी एनकाउंटर था। उनका कहना है कि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था या वह पुलिस हिरासत में थे। इसके बावजूद उन्हें गोली मार दी गई। हालांकि, इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया और निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी।
इसके बाद राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। बिहार सरकार ने पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक न्यायिक जांच आयोग का गठन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कई पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया।