असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा 22 फरवरी को भाजपा में शामिल होंगे। जानें उनके इस्तीफे की असली वजह और गौरव गोगोई व हिमंत बिस्वा सरमा के बीच छिड़ी इस सियासी जंग की कहानी।
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले असम की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा 22 फरवरी 2026 को भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। राज्य की राजनीति में इसे कांग्रेस के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। बोरा के भाजपा में शामिल होने को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 'घर वापसी' बताया है, जबकि कांग्रेस ने इसके लिए उन्हें आड़े हाथों लिया है। वहीं अब, खुद भूपेन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा देने के कारणों का खुलासा किया है।
भूपेन कुमार बोरा ने कहा, "मैंने कांग्रेस पार्टी को 32 साल दिए। कांग्रेस ने मुझे विधायक (MLA) से APCC अध्यक्ष बनाया। जब मैं 2021 में अध्यक्ष बना तो कांग्रेस AIUDF के साथ गठबंधन में थी। मैंने वह गठबंधन तोड़ा। उसके बाद मैंने INDIA गठबंधन बनने से पहले 16 पार्टियों के साथ गठबंधन किया। उपचुनाव में तय हुआ कि एक सीट CPI(ML) को दी जाएगी, लेकिन अचानक उस रात एक अलग व्यक्ति के नाम की घोषणा की गई जो कभी कांग्रेस का सदस्य नहीं था। गौरव गोगोई वह सीट नहीं जिता पाए। 9 फरवरी को गठबंधन को लेकर एक वीडियो कॉन्फ्रेंस हुई। मुझे फिर से गठबंधन बनाने के लिए कहा गया। मैंने बातचीत शुरू की। 11 तारीख को गौरव गोगोई ने कहा कि आप अकेले नहीं, रकीबुल हुसैन को भी साथ ले लीजिए। मैं सभी पार्टियों से बात कर रहा था, लेकिन 13 तारीख को गौरव गोगोई ने ऐलान किया कि भूपेन बोरा ने गलतफहमी पैदा की है। मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने मुझे सबके सामने बेइज्जत क्यों किया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने राहुल गांधी से भी कहा कि मैं ऐसा अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता, लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा।"
वहीं, कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने भूपेन बोरा के इस्तीफे पर हिमंत बिस्वा सरमा की आलोचना करते हुए कहा, "हिमंत बिस्वा सरमा और भूपेन बोरा के करीबी संबंधों को लेकर कई अफवाहें थीं। हमने पूरी कोशिश की कि इन अफवाहों और अटकलों पर विश्वास न करें, लेकिन हम हमेशा यह सोचते रहे कि कैसे गोपनीय बैठकों से संबंधित जानकारी किसी विशेष पत्रकार तक पहुंचती थी जो हिमंत बिश्वा सरमा के करीब है।''
उन्होंने आगे कहा, ''अब ये अफवाहें और अटकलें, पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह, सच साबित हुई हैं। क्योंकि कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने के बाद, भूपेन बोरा को भाजपा में शामिल होने और हिमंत बिस्वा सरमा के सामने आत्मसमर्पण करने में कोई हिचकिचाहट नहीं थी, वही व्यक्ति जिस पर उन्होंने पिछले कई सालों से राजनीतिक रूप से हमला किया था। और यह हिमंत बिस्वा सरमा की हड़बड़ी को भी दिखाता है क्योंकि आज पूरे असम राज्य में यह सवाल उठ रहा है कि कैसे 12,000 बीघा यानी 4,000 एकड़ जमीन एक परिवार के पास हो सकती है? यह कैसे हुआ?"