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AI Impact Summit 2026: ‘अपनी भाषा-अपना डेटा’ फॉर्मूले से दुनिया को चौंकाने जा रहा भारत

India AI Impact Summit 2026: इंडिया एआइ इंपैक्ट समिट 2026 में ‘स्केलिंग इंपैक्ट फ्रॉम इंडियाज सॉवरेन एआइ एंड डेटा’ सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत एआइ का सिर्फ उपभोक्ता न बनकर वैश्विक स्तर पर एआइ सिस्टम का निर्माता कैस बने।

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भारत

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Ashib Khan

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शादाब अहमद

Feb 18, 2026

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एआइ से बदलेगा भारत का विकास मॉडल (Photo-IANS)

AI Impact Summit 2026: भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) में इसी स्वदेशी मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। ‘सॉवरेन एआइ’ की अवधारणा के जरिए देश केवल तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि विकास का अपना मॉडल गढऩे की तैयारी में है। लक्ष्य साफ है कि डेटा पर राष्ट्रीय नियंत्रण, भारतीय भाषाओं के अनुरूप स्वदेशी एआइ सिस्टम और ऐसे समाधान जो खेती, इलाज, पढ़ाई और बैंकिंग जैसी रोजमर्रा की जरूरतों को सीधे बेहतर बनाएं।

इंडिया एआइ इंपैक्ट समिट 2026 में ‘स्केलिंग इंपैक्ट फ्रॉम इंडियाज सॉवरेन एआइ एंड डेटा’ सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत एआइ का सिर्फ उपभोक्ता न बनकर वैश्विक स्तर पर एआइ सिस्टम का निर्माता कैस बने। एआइ शोध को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, जैसे वित्तीय समावेशन, कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। सार्थक और समावेशी परिणाम सुनिश्चित करने के लिए एआइ को भारत के विकास लक्ष्यों के अनुरूप ढालना आवश्यक है।

क्या है सॉवरेन एआइ

एआइ मॉडल का विकास देश के भीतर हो, जिसका डेटा, सर्वर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर राष्ट्रीय नियंत्रण हो। यह मॉडल भारतीय भाषाओं और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए। साथ ही रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता कम होनी चाहिए।

आम आदमी का जीवन कैसे बदलेगा सॉवरेन एआइ

  1. अपनी भाषा में डिजिटल सेवाएं: भारत में करोड़ों लोग अंग्रेजी नहीं जानते। अगर एआइ मॉडल विदेशी डेटा पर आधारित होंगे, तो वे स्थानीय भाषाओं और संदर्भों को पूरी तरह नहीं समझ पाएंगे। स्वदेशी होने से सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा की जानकारी स्थानीय भाषाओं में अधिक सटीक और आसान रूप में मिल सकेगी।
  2. कृषि और ग्रामीण क्षेत्र में मदद: फसल रोग पहचान, मौसम पूर्वानुमान और बाजार कीमत की जानकारी एआइ के जरिए सीधे किसान तक पहुंच सकती है।
  3. स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार : ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक जांच और डायग्नोस्टिक टूल्स एआइ के माध्यम से उपलब्ध हो सकते हैं।
  4. शिक्षा और कौशल विकास: छात्रों को उनकी जरूरत के अनुसार डिजिटल ट्यूटर और व्यक्तिगत सीखने की सुविधा मिल सकती है।
  5. रणनीतिक मजबूती: सरकारी सेवाओं, रक्षा, अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी एआइ मॉडल होने से डेटा सुरक्षा और निर्णय क्षमता मजबूत होगी

चुनौतियां भी कम नहीं

  • गहन शोध (डीप रिसर्च) से जुड़ी प्रतिभा की कमी
  • दीर्घकालिक नवाचार निवेश के अंतर को दूर करने की आवश्यकता
  • डिजिटल खाई को कम करना