18वीं लोकसभा के शुरुआती सत्र में ही विपक्ष ने प्रोटेम स्पीकर को लेकर विरोध किया है। लोकसभा के लिए भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब प्रोटेम स्पीकर बनाए गए हैं। कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज की है।
18वीं लोकसभा का पहला सत्र प्रारंभ होते ही सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। लोकसभाा के प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है। 18वीं लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार रहे राहुल गांधी वायनाड और रायबरेली से जीत दर्ज की थी। इसके बाद उन्होंने वायनाड की संसदीय सीट को छोड़ने का फैसला किया है। अब वहां से राहुल की बहन प्रियंका गांधी को कांग्रेस पार्टी ने उम्मीदवार बनाया।
प्रोटेम स्पीकर का किया विरोध
18वीं लोकसभा के शुरुआती सत्र में ही विपक्ष ने प्रोटेम स्पीकर को लेकर विरोध किया है। लोकसभा के लिए भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब प्रोटेम स्पीकर बनाए गए हैं। कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज की है। इंडिया ब्लॉक का कहना है कि यह संसदीय परंपरा के खिलाफ लिया गया निर्णय है। कांग्रेस का कहना है कोडिकुन्निल सुरेश को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाना चाहिए था, उनकी वरिष्ठता नजरअंदाज की गई है।
लोकसभा की परंपरा का उल्लंघन: विपक्ष
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब को 18वीं लोकसभा के लिए प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया है। इसपर कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने भी आपत्ति दर्ज की। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने लोकसभा की परंपरा का उल्लंघन है। लोकसभा में यह परंपरा रही है कि जो सांसद सबसे अधिक बार निर्वाचित होता है, वही प्रोटेम स्पीकर बनता है। के. सुरेश ने कहा कि भर्तृहरि महताब 7वीं बार सांसद चुनकर आए हैं, जबकि वह 8वीं बार सांसद चुने गए हैं।
कांग्रेस ने भी दर्ज कराई आपत्ति
कांग्रेस ने भी इस पर अपनी आपत्ति दर्ज की है और इसे संसदीय परंपरा के खिलाफ लिया गया निर्णय कहा। इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल कह चुके हैं कि यह संसदीय मानदंडों को नष्ट करने का एक और प्रयास है, जिसमें भर्तृहरि महताब (सात बार के सांसद) को कोडिकुन्निल सुरेश की जगह प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि कोडिकुन्निल सुरेश अपने आठवें कार्यकाल में प्रवेश करेंगे। यह एक निर्विवाद मानदंड है कि अध्यक्ष के विधिवत चुनाव से पहले सबसे वरिष्ठ सांसद सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता करता है।