
नई दिल्ली। जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़े कानून को और सख्त बनाते हुए संसद ने मंगलवार को ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी। नए संशोधनों के तहत अब यदि किसी बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु का पंजीकरण घटना के दो साल बाद कराया जाता है, तो इसके लिए कोर्ट के चक्कर काटने होंगे। बता दें कि यह विधेयक केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 24 जुलाई को लोकसभा में पेश किया गया था, जिसे अब राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति की स्वीकृति और केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद यह कानून लागू हो जाएगा।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार चाहती है कि भारत माता की कोख में जन्मे हर बच्चे का विधिवत पंजीकरण हो और देश को घुसपैठ के भूत से छुटकारा मिले। उन्होंने कहा कि आज देशभर में 3.5 लाख से अधिक जन्म-मृत्यु पंजीकरण केंद्र स्थापित किए गए हैं। 2014 में मोदी सरकार के आने से पहले जन्म के पंजीकरण की दर 86.6 प्रतिशत थी जो आज बढ़कर 99.8 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह मृत्यु पंजीकरण की दर 72.5 प्रतिशत से बढ़कर 99.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
1969 के पुराने कानून की धारा 13(3) में बदलाव करते हुए दो अलग-अलग व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 1 साल से 2 साल के भीतर कराया जाता है, तो इसकी अनुमति पहले की तरह ही 'एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट' (उपखंड अधिकारी/एसडीएम या जिला मजिस्ट्रेट) के स्तर से मिलेगी। यदि पंजीकरण में 2 साल से अधिक का समय बीत चुका है, तो मामला सीधे कोर्ट जाएगा। इसके लिए 'ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास' (प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट) से आदेश लेना अनिवार्य होगा।
साल 2023 में हुए संशोधनों के तहत जन्म प्रमाण पत्र को देश के सबसे महत्वपूर्ण एकल दस्तावेज (सिंगल डॉक्यूमेंट) का दर्जा दिया गया था। इसके तहत स्कूल में दाखिला, पासपोर्ट, मतदाता सूची में नाम, ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी नौकरी और अन्य प्रमुख पहचान दस्तावेजों के लिए जन्म प्रमाण पत्र मुख्य आधार बन चुका है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर जन्म और मृत्यु का डिजिटल डेटाबेस तैयार करने का भी प्रावधान किया गया था, जिसे विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ साझा किया जा सकता है। अब 2026 के इस नए संशोधन के जरिए देर से पंजीकरण कराने वालों के लिए नियम और अधिक कड़े कर दिए गए हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देर से होने वाली फर्जी एंट्रियों और धांधली को रोकने के लिए जांच प्रक्रिया को सख्त बनाया गया है। 2023 में जहां देरी पर जुर्माना बढ़ाकर 50 रुपए से 250 रुपए और अस्पतालों के लिए 1,000 रुपए तक किया गया था, वहीं अब 2026 के इस संशोधन से 'लेट एंट्री' के रास्ते को पूरी तरह अदालत की निगरानी में ला दिया गया है ताकि लोग समय पर पंजीकरण कराने को प्राथमिकता दें।