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NEET UG 2026 Protest: BJP नेता की बेटी ने छात्रों के आंदोलन का किया समर्थन, बोलीं- सिर्फ इस्तीफा नहीं, शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत

NEET paper leak 2026 : NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर देशभर में चले छात्र आंदोलन पर अब सियासी और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। भाजपा के पूर्व विधायक की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने आंदोलन का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठाए हैं।
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Jul 31, 2026
Yashaswinee Raje Singh
Yashaswinee Raje Singh :BJP नेता की बेटी ने छात्रों के आंदोलन का किया समर्थन, बोलीं- सिर्फ इस्तीफा नहीं, शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत (फोटो सोर्स:@Shoonya_ydv)

Dharmendra Pradhan Resignation: छात्रों के उग्र प्रदर्शन और 36 दिनों के लंबे गतिरोध के बाद भले ही केंद्र सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया हो, लेकिन देश का युवा अब भी शांत होने के मूड में नहीं है। नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर उतरी ‘जेन-जी’ (Gen Z) पीढ़ी को अब सत्ताधारी दल के भीतर से ही वैचारिक समर्थन मिलने लगा है। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सदर से पूर्व भाजपा विधायक विक्रम सिंह की बेटी और कंटेंट क्रिएटर यशस्विनी राजे सिंह ने न सिर्फ खुले तौर पर इस छात्र आंदोलन का झंडा बुलंद किया, बल्कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में हुए हालिया बदलावों की कड़े शब्दों में आलोचना भी की है।

जंतर-मंतर के प्रदर्शन में भी हुई थीं शामिल

यशस्विनी उन लोगों में शामिल थीं जिन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले आयोजित किया गया था। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में युवाओं और छात्रों ने भाग लिया और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग उठाई।

20 जून से शुरू हुआ यह आंदोलन 36 दिनों तक चला और 25 जुलाई को समाप्त हुआ। आंदोलन के दौरान छात्रों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और जवाबदेही तय करने जैसी कई मांगें रखीं। बाद में सरकार द्वारा प्रमुख मांगों को स्वीकार किए जाने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।

'इस्तीफा कोई ऐतिहासिक मोड़ नहीं'

यशस्विनी ने कहा कि शिक्षा मंत्री का पद छोड़ना महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसे अंतिम जीत या ऐतिहासिक मोड़ मानना जल्दबाजी होगी। उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि इस्तीफे के दौरान आंदोलन और प्रदर्शनकारियों के लिए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

उनका कहना था कि छात्रों की आवाज को सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए, क्योंकि वे अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए संघर्ष कर रहे थे।

NEET विवाद ने बढ़ाई परीक्षा प्रणाली पर बहस

NEET-UG 2026 पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर पूरे देश में बहस छिड़ गई। छात्रों और अभिभावकों ने पारदर्शी व्यवस्था, सुरक्षित प्रश्नपत्र प्रणाली और समयबद्ध जांच की मांग उठाई। सोशल मीडिया से लेकर विश्वविद्यालय परिसरों तक इस मुद्दे ने व्यापक चर्चा को जन्म दिया।

शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने प्रतियोगी परीक्षाओं पर छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। ऐसे में केवल दोषियों पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक सुधार भी जरूरी हैं।

राजनीतिक सरहदों से आगे बढ़ा छात्र आंदोलन

इस आंदोलन की खास बात यह रही कि इसमें विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के लोग भी छात्रों के समर्थन में सामने आए। विपक्षी दलों ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में विफल रहने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नए कदम उठाने का भरोसा दिया।

यशस्विनी राजे सिंह का बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह ऐसे राजनीतिक परिवार से आती हैं जिसकी पहचान भाजपा से जुड़ी रही है। ऐसे में उनका छात्रों के पक्ष में खुलकर बोलना इस पूरे विवाद को नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम देता है।

आगे की चुनौती क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक मंत्री के इस्तीफे से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। असली चुनौती ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करने की है, जिसमें पेपर लीक की संभावना न्यूनतम हो, तकनीकी सुरक्षा मजबूत हो और छात्रों का विश्वास दोबारा कायम किया जा सके। आने वाले समय में सरकार द्वारा किए जाने वाले सुधारों पर देशभर के लाखों छात्र और अभिभावकों की नजर रहेगी।

Updated on:
31 Jul 2026 02:22 pm
Published on:
31 Jul 2026 02:21 pm