ओडिशा और बिहार में जीत के बाद अब भाजपा का लक्ष्य पश्चिम बंगाल है। 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी ने हरियाणा-दिल्ली मॉडल पर 'माइक्रो मैनेजमेंट' रणनीति तैयार की है, जिसमें 6 जोन, बाहरी प्रभारियों की तैनाती और 6% वोट स्विंग के जरिए टीएमसी के गढ़ में सेंध लगाने की तैयारी है।
West Bengal Election 2026: कलिंग और अंग के बाद अब बंग यानी पश्चिम बंगाल पर भाजपा का पूरा फोकस है। ओडिशा (कलिंग) में सत्ता और बिहार (अंग) में एनडीए की बड़ी जीत के बाद भाजपा पश्चिम बंगाल में भी हरियाणा–दिल्ली का माइक्रो मैनेजमेंट फार्मूला लागू करने जा रही है। अप्रैल में संभावित विधानसभा चुनावों को भाजपा ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ के संकल्प के साथ लड़ने की तैयारी में है। इसके तहत बूथ से लेकर राज्य स्तर तक संगठनात्मक निगरानी, बाहरी प्रभारियों की तैनाती और जीत की संभावना वाले उम्मीदवारों को टिकट देने की रणनीति अपनाई जा रही है। पार्टी का लक्ष्य तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाकर सत्ता की राह बनाना है।
भाजपा ने पूरे पश्चिम बंगाल को छह बड़े अंचलों में बांटकर माइक्रो मैनेजमेंट प्लान तैयार किया है। इन अंचलों की जिम्मेदारी चुनाव प्रबंधन में माहिर, राज्य से बाहर के नेताओं को सौंपी गई है। लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों में भी देशभर से प्रवासी कार्यकर्ताओं को प्रभारी बनाकर भेजा जा रहा है। ये प्रभारी स्थानीय भाजपा के साथ-साथ टीएमसी व अन्य दलों की गतिविधियों, असंतुष्ट पदाधिकारियों और संभावित दल-बदल पर नजर रखेंगे। पार्टी अंतिम समय तक विकल्प खुले रखकर जीतने वाले उम्मीदवार को टिकट देने की तैयारी में है। 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 77 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल कर 38.14 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, वहीं टीएमसी ने 48.02 प्रतिशत के साथ 213 सीटें हासिल की थीं। इस बार भाजपा घुसपैठ, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को मुद्दा बनाकर करीब छह प्रतिशत वोट स्विंग की रणनीति पर काम कर रही है।
हुगली, कोलकाता, हावड़ा तथा उत्तर व दक्षिण 24 परगना का क्षेत्र भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। 108 सीटों वाले इस इलाके में 2021 में टीएमसी ने 98, भाजपा ने 9 और आइएसएफ ने 1 सीट जीती थी। पार्टी एक चेहरे के बजाय सामूहिक नेतृत्व पर जोर दे रही है। अमित शाह ने हालिया दौरे में शमिक भट्टाचार्य, सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार और दिलीप घोष को एकजुट रहने का संदेश दिया।