
बेंगलुरु में शुक्रवार को एक नया राजनीतिक विवाद देखने को मिला। बीजेपी नेताओं ने शहर के पुलिस कमिश्नर के ऑफिस के सामने धरना दे दिया। उनका आरोप था कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके मंत्रिमंडल के साथियों ने कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि गुरुवार को सीएम शिवकुमार खुद चुनाव आयोग के मुख्य अधिकारी के ऑफिस के सामने धरना दे रहे थे। उन्होंने फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग की जांच और एफआईआर की मांग की थी। वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान ये मुद्दा उठा था। अब बीजेपी पूछ रही है कि पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?
राज्य के विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाड़ी नारायणस्वामी ने साफ कहा- हम अपनी मांग लेकर आए हैं। कल पूरी सरकार चुनाव आयोग के सामने धरना दे रही था। पुलिस ने उनके खिलाफ FIR दर्ज की क्या? यही सवाल हम कमिश्नर से पूछने आए हैं।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोका और अन्य नेता पुलिस कमिश्नर सीमंत कुमार सिंह से मिले। उन्होंने एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सीएम समेत कई मंत्रियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई।
बीजेपी का तर्क है कि अगर आम नागरिक कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करता तो पुलिस तुरंत कार्रवाई करती। लेकिन जब सरकार के बड़े नेता ऐसा करते हैं तो चुप्पी साध ली जाती है। ये दोहरा रवैया का उदाहरण है।
कांग्रेस की तरफ से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। शिवकुमार ने गुरुवार को फॉर्म-7 के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया था। उनका आरोप था कि विपक्ष के लोग गलत तरीके से वोटर लिस्ट में नाम कटवाने की कोशिश कर रहे हैं।
बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर ऑफिस के बाहर बीजेपी कार्यकर्ताओं का जमावड़ा रहा। नारेबाजी भी हुई। नेताओं ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। चाहे कोई मुख्यमंत्री हो या आम आदमी।
ये घटना कर्नाटक की सियासत में तनाव बढ़ा रही है। दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं। पुलिस अब क्या कदम उठाती है, ये देखना बाकी है। ज्ञापन मिलने के बाद कमिश्नर सिंह ने कोई तुरंत बयान नहीं दिया।