राष्ट्रीय

अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं- BRICS करेंसी को लेकर विदेश मंत्रालय ने दी प्रतिक्रिया

BRICS 2026: ब्रिक्स समिट में व्यापार, भुगतान और सहयोग पर जोर रहा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि लोकल करेंसी पर अभी कोई प्रस्ताव नहीं है।
2 min read
BRICS Currency Trade Update
BRICS करेंसी को लेकर MEA का बड़ा बयान (सोर्स- आईएएनएस)

BRICS Currency Trade Update: ब्रिक्स को लेकर अक्सर एक सवाल उठता है। क्या इस समूह के देश मिलकर कोई नई करेंसी शुरू करने जा रहे हैं? फिलहाल इसका जवाब नहीं है। भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि BRICS करेंसी को लेकर अभी तक कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं आया है। हालांकि, सदस्य देशों के बीच लोकल करेंसी में कारोबार को लेकर चर्चा जरूर चल रही है।

BRICS करेंसी पर MEA ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय के इकोनॉमिक रिलेशन्स सेक्रेटरी सुधाकर दलेला ने शनिवार को इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि BRICS में किसी साझा करेंसी का अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने बताया कि लोकल करेंसी में ट्रेड पर कुछ समय से चर्चा हो रही है। इसका मकसद अलग-अलग देशों के बीच कारोबार को आसान बनाना है।

भारत का मानना है कि लोकल करेंसी में सेटलमेंट एक व्यापार के दृष्टिकोण से व्यावहारिक और अच्छा विकल्प हो सकता है। इससे बाइलेटरल ट्रेड में लेनदेन की लागत कम हो सकती है। इससे देशों के बीच व्यापार को और बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। पेमेंट सिस्टम आसान होगा।

BRICS समिट में कई मुद्दों पर हुआ काम

BRICS समिट में सिर्फ करेंसी और भुगतान व्यवस्था पर चर्चा नहीं हुई। कई दूसरे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। सुधाकर दलेला के मुताबिक, BRICS MSME कोऑपरेशन पोर्टल अहम पहल रही। ग्लोबल वैल्यू चेन में सहयोग और लॉजिस्टिक्स फ्रेमवर्क पर भी काम हुआ। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यानी DPI के क्षेत्र में सहयोग को भी महत्व दिया गया। साइंस और रिसर्च से जुड़े कामों पर चर्चा हुई। स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया। खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहे। मेंटल हेल्थ के क्षेत्र में सहयोग को भी खास उपलब्धियों में शामिल किया गया। भारत की BRICS चेयरपर्सनशिप के दौरान 350 से ज्यादा बैठकें हुईं। ये बैठकें देश के 30 से ज्यादा शहरों में आयोजित की गईं। दलेला ने इसे पूरे देश का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि समिट से चार प्रमुख क्षेत्रों में करीब 150 व्यावहारिक नतीजे सामने आए।

नई दिल्ली डिक्लेरेशन में व्यापार पर जोर

वहीं BRICS देशों ने नई दिल्ली डिक्लेरेशन को भी सर्वसम्मति से अपनाया। इसमें बढ़ते एकतरफा टैरिफ और नॉन-टैरिफ उपायों को लेकर चिंता जताई गई। BRICS देशों ने नियमों पर आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था के प्रति अपना समर्थन दोहराया। WTO को केंद्र में रखकर एक खुली और पारदर्शी मल्टीलेटरल ट्रेडिंग सिस्टम की जरूरत पर जोर दिया गया। डिक्लेरेशन में इथियोपिया और ईरान की WTO में शामिल होने की कोशिश का समर्थन किया गया। वहीं, चीन द्वारा 53 अफ्रीकी देशों के लिए जीरो-टैरिफ ट्रीटमेंट बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया गया।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी BRICS देशों से आर्थिक सहयोग मजबूत करने की अपील की। उन्होंने बाजार खोलने, नियमों को आसान बनाने और पेमेंट सिस्टम को जोड़ने पर जोर दिया। साफ है कि फिलहाल BRICS की साझा करेंसी का कोई प्रस्ताव नहीं है। लेकिन लोकल करेंसी में कारोबार को लेकर चर्चा आगे बढ़ रही है। यही मुद्दा आने वाले समय में BRICS के आर्थिक सहयोग की दिशा तय कर सकता है।

Updated on:
12 Sept 2026 08:09 pm
Published on:
12 Sept 2026 08:09 pm