
S Jaishankar BRICS Speech 2026: भारत की अध्यक्षता में हो रहा BRICS Summit 2026 केवल कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश भी सामने आ रही है। नई दिल्ली का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिसमें सदस्य देशों के कारोबार को नए बाजार, साझेदार और तकनीकी अवसर मिलें। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसी सोच को रेखांकित करते हुए नवाचार, स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक और मजबूत आपूर्ति शृंखला को BRICS की अगली आर्थिक कहानी का अहम हिस्सा बताया।
नई दिल्ली में BRICS Business Forum को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आने वाले दौर में समूह की सफलता इस बात से तय होगी कि सदस्य देशों के कारोबार के बीच व्यावहारिक जुड़ाव कितना मजबूत होता है। उनका जोर कंपनियों के लिए नए कारोबारी साझेदार तलाशने, बाजारों तक पहुंच आसान बनाने और विभिन्न देशों की सप्लाई चेन को आपस में जोड़ने पर रहा।
जयशंकर ने तकनीक को मौजूदा आर्थिक और भू-राजनीतिक बदलावों का महत्वपूर्ण आधार बताया। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र BRICS देशों के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकते हैं। हालांकि, इनके विस्तार के साथ डेटा सुरक्षा, भरोसे, मानकों और तकनीक तक समान पहुंच जैसे सवाल भी चुनौती बने रहेंगे।
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए BRICS incubator network पर भी जोर दिया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के स्टार्टअप और इनक्यूबेटर्स को एक-दूसरे से जोड़ना है। इसके साथ BRICS Startup Innovation Fund को नवाचार आधारित उद्यमों के लिए वित्तीय सहयोग के संभावित माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
विदेश मंत्री ने आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा के बीच सीधे संबंध की बात भी रखी। उनके मुताबिक कारोबार बढ़ने और आर्थिक सुरक्षा मजबूत होने से देशों की आत्मनिर्भरता बढ़ सकती है। साथ ही लक्ष्य यह होना चाहिए कि वैश्विक झटकों के बीच अर्थव्यवस्थाएं टिकाऊ बनी रहें, लेकिन दुनिया से उनका संपर्क और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर न पड़े।
भारत की आर्थिक ताकत का उल्लेख करते हुए जयशंकर ने बड़े घरेलू बाजार, बढ़ती विनिर्माण क्षमता, प्रतिभाशाली मानव संसाधन और डिजिटल अनुभव को देश की प्रमुख ताकत बताया। उन्होंने BRICS Business Forum से समूह के अगले चरण के लिए स्पष्ट कारोबारी दृष्टिकोण सामने रखने की अपेक्षा जताई।
रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने भी भारत की अध्यक्षता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने इस दौरान सैकड़ों मंत्रीस्तरीय बैठकों के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में काम आगे बढ़ाया। स्मार्ट ग्रिड, ऊर्जा भंडारण, स्टार्टअप इनोवेशन हब, इनक्यूबेटर नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स-सप्लाई चेन फ्रेमवर्क जैसी भारतीय पहलों का भी उन्होंने उल्लेख किया।