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BRICS पर भिड़े कांग्रेस के दो बड़े चेहरे! चिदंबरम बोले ‘फायदा क्या मिला?’ थरूर ने बताया क्यों है बड़ा मौका

Shashi Tharoor on BRICS: क्या किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की सफलता केवल तुरंत मिलने वाले आर्थिक या रणनीतिक फायदे से तय की जा सकती है? थरूर का जवाब इससे अलग है। उन्होंने BRICS को भारत की ‘डिप्लोमैटिक कन्वीनिंग पावर’ दिखाने वाला मंच बताया, जबकि BJP ने चिदंबरम के सवालों को कांग्रेस की विदेश नीति पर निशाना साधने का मौका बना लिया है।
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BRICS Summit 2026

BRICS Summit 2026: चिदंबरम के सवालों से अलग थरूर का स्टैंड, बोले- दुनिया को दिख रही भारत की ताकत (फोटो सोर्स: ANI)

BRICS Summit 2026: BRICS सम्मेलन को लेकर कांग्रेस के भीतर उठे सवालों ने अब सियासी रंग ले लिया है। वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने जहां हालिया BRICS बैठकों से भारत को मिले ठोस लाभ पर सवाल उठाए, वहीं पार्टी सांसद शशि थरूर ने इस मंच का खुलकर बचाव किया है। थरूर ने दिल्ली में होने वाले सम्मेलन को भारत के लिए प्रतिष्ठा और वैश्विक कूटनीति में प्रभाव बढ़ाने का अवसर बताया। उनके बयान ने पार्टी के भीतर BRICS को लेकर अलग-अलग नजरिए को सामने ला दिया है।

Shashi Tharoor on BRICS: शशि थरूर का रुख: वैश्विक मंच पर कूटनीतिक क्षमता का प्रदर्शन

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने BRICS सम्मेलन को लेकर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम से अलग राय रखते हुए इसे भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि बताया है। समाचार एजेंसी PTI को दिए बयान में थरूर ने कहा कि भारत का BRICS की मेजबानी करना केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर देश की कूटनीतिक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर है।

BRICS Summit 2026: ग्लोबल साउथ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव

थरूर के मुताबिक BRICS में शामिल देश दुनिया की बड़ी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके अनुसार इस मंच के जरिए भारत को ग्लोबल साउथ के देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिए जाने वाला समूह बताया।

BRICS Summit 2026: भारत की ‘कन्वीनिंग पावर’ का उदाहरण

थरूर ने यह भी रेखांकित किया कि सम्मेलन में सदस्य देशों के अलावा पर्यवेक्षक देशों के शीर्ष नेता भी हिस्सा लेने वाले हैं। उनके मुताबिक एक साथ इतने राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों का भारत आना देश की कूटनीतिक ‘कन्वीनिंग पावर’ यानी अलग-अलग देशों को एक मंच पर लाने की क्षमता को दर्शाता है।

P Chidambaram BRICS Statement: पी. चिदंबरम का सवाल: भारत को क्या ठोस लाभ मिला?

इसके उलट, चिदंबरम ने एक दिन पहले समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में BRICS समेत विभिन्न बहुपक्षीय संगठनों से भारत को मिलने वाले ठोस परिणामों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने BRICS, SCO, G20 और QUAD की सदस्यता का उल्लेख करते हुए पूछा था कि इन मंचों से भारत को वास्तविक लाभ क्या हासिल हुआ। उनका कहना था कि हाल के दो-तीन BRICS सम्मेलनों से उन्हें कोई उल्लेखनीय ठोस नतीजा दिखाई नहीं दिया।

चिदंबरम के बयान के बाद BJP ने कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया। BJP नेता नलिन कोहली ने सवाल उठाया कि क्या विदेश नीति को केवल तत्काल लेन-देन के नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे देशों के नेताओं के बीच संभावित द्विपक्षीय मुलाकातों को भी अहम बताया।

BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस के रुख को ‘नाराज फूफा’ जैसी राजनीति करार देते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को लेकर असहज है।

भारत BRICS का संस्थापक सदस्य है और पहले भी 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है। इस बार भारत ने 1 जनवरी को चौथी बार समूह की अध्यक्षता संभाली। दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाला 18वां BRICS शिखर सम्मेलन ‘Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ की थीम पर केंद्रित है। पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक प्रभाव समेत कई वैश्विक चुनौतियों पर भी इसमें चर्चा होने की उम्मीद है।

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