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Order: आरोपी के घर बुलडोजर एक्शन बीजेपी सरकार को पड़ा भारी, देना पड़ गया 30 लाख रुपए का मुआवजा

Assam BJP Government: आरोपियाें के घर पर चलाया बुलडोजर,सरकार को देना पड़ा 30 लाख मुआवजा, अफसरों पर कार्रवाई के लिए चार सप्ताह का समय

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Bulldozer Action: असम के नौगांव जिले में एक पुलिस थाने में आग लगाने के आरोपियों के घर पर बुलडोजर चलाना राज्य सरकार को महंगा पड़ गया। राज्य सरकार को अब बुलडोजर पीडि़तों को 30 लाख रुपए मुआवजा देना पड़ा है। असम सरकार ने गौहाटी हाईकोर्ट को सूचित किया कि जिन छह आरोपियों के घर बुलडोजर से ध्वस्त किए गए थे उन्हें नुकसान के आधार पर कुल 30 लाख रुपए मुआवजे के चैक दे दिए गए हैं।

चीफ जस्टिस विजय विश्नोई और जस्टिस सुमन श्याम की बेंच एक स्वप्रेरित जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो इस आरोप के आधार पर दर्ज की गई थी कि नौगांव के एक नागरिक के घर को बटद्रवा थाने के पुलिसकर्मियों ने बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया था। प्रभावित छह लोगों पर मई 2022 में बटद्रवा थाने में आगजनी का आरोप है। काेर्ट में सरकारी वकील ने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई के दौरान जान गंवाने वाले एक शख्स सफीकुल इस्लाम के वारिस तय नहीं होने के कारण उसे मुआवजा नहीं दिया जा सका। कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई के दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है।

मेधा पाटकर मानहानि की दोषी करार

नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) की नेता मेधा पाटकर को घटना के समय एक एनजीओ से जुड़े और अब दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना की मानहानि का दोषी करार दिया है। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने पाटकर को आपराधिक मानहानि का दोषी पाया है। इस अपराध के लिए पाटकर को दो साल की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा सुनाई जा सकती है। अहमदाबाद स्थित एनजीओ नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज के तत्कालीन प्रमुख सक्सेना ने एनबीए के एक प्रेस नोट में खुद पर की गई टिप्पणी पर 2001 में पाटकर के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करवाया था। प्रेस नोट में 'देशभक्त नहीं कायर' कहा था। कोर्ट ने फैसले में कहा कि पाटकर ने जो भी किया वो जानबूझकर और सक्सेना की छवि खराब करने के मकसद से किया।

विज्ञापन मामले में भाजपा पहुंची सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव में टीएमसी के खिलाफ भाजपा के अपमानजनक और आचार संहिता के उल्लंघनकारी विज्ञापन देने पर कलकत्ता हाईकोर्ट की रोक के खिलाफ भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच में शुक्रवार को भाजपा ने एक जून को मतदान का हवाला देते हुए कहा कि हाईकोर्ट के एकतरफा आदेश पर तत्काल सुनवाई की जाए। कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग नहीं मानी।

उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें राज्य सरकार को हाईकोर्ट को नैनीताल परिसर से स्थानांतरित करने के लिए उपयुक्त स्थान खोजने को कहा गया था। हाईकोर्ट ने इसे व्यापक जनहित में आवश्यक बताया था। हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर नोटिस जारी कर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई आठ जुलाई के बाद होगी।

Published on:
25 May 2024 01:45 pm
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