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CAIT ने राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी, पूछा- भारी आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

CAIT ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर पूछा कि दिल्ली में रैलियों और धरना-प्रदर्शनों से व्यापारियों को हुए भारी आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा। दीवाली के बाद बैठक होगी।
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Updated: 5 Nov 2026, 10:02 AM IST
Rahul Gandhi
राहुल गांधी (फोटो सोर्स- ANI)

CAIT letter to Rahul Gandhi: कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि एक महीने के दौरान विपक्षी नेताओं द्वारा आयोजित रैलियों, धरना प्रदर्शन के कारण व्यापारिक गतिविधियों पर बुरा असर पड़ा है। CAIT ने कहा कि वह राहुल गांधी के जवाब की प्रतीक्षा करेगा। संगठन ने कहा कि हम दीवाली के तुरंत बाद हम दिल्ली व देश भर के प्रमुख व्यापारी नेताओं की बैठक आयोजित करेंगे। इसमें रणनीति तय की जाएगी।

भारत का व्यापारी वर्ग इतना कमजोर नहीं है: CAIT

CAIT ने नेता प्रतिपक्ष को लिखे पत्र में कहा कि भारत का व्यापारी वर्ग इतना कमजोर नहीं है कि ऐसी परिस्थितियों को अनिश्चित काल तक सहता रहे। अब समय आ गया है कि कड़ा संदेश दिया जाए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी दो विरोधाभाषी रुख नहीं रख सकते हैं। पहले तो वह लोगों से स्थानीय बाजारों से खरीदारी करने की अपील करते हैं, तो दूसरी ओर ऐसी राजनीतिक गतिविधियों और प्रदर्शनों का समर्थन करते हैं जो ग्राहकों को उन्हीं बाजारों तक पहुंचने से रोकते हैं।

विरोध का अधिकार, व्यापार करने और आजीविका कमाने के अधिकार से ऊपर है? बी.सी. भरतिया

संगठन के अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने कहा कि क्या राहुल गांधी मानते हैं कि विरोध का अधिकार, व्यापार करने और आजीविका कमाने के अधिकार से ऊपर है? क्या संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) केवल भाषणों और किताबों के लिए है। उन्होंने कहा कि इन प्रदर्शनों से व्यापारियों और कामगार परिवारों को हुए भारी आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या कांग्रेस की राजनीतिक कार्यशैली में ऐसा कोई प्रावधान है, जिसके तहत बाधा पैदा करने वाले प्रदर्शनों के आयोजक और समर्थक उनसे हुए आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी स्वीकार करें?

उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक दलों को यह बात समझनी होगी कि दिल्ली केवल राजनीतिक प्रदर्शनों और शक्ति-प्रदर्शन का मंच नहीं है, बल्कि देश के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक और आर्थिक केंद्रों में से एक भी है। लाखों लोगों की रोजी रोटी व्यापार पर टिकी हुई है। व्यापारी किसी की राजनीतिक लड़ाई के पंचिंग बैग नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को समझना चाहिए कि सरकार का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी और की रोज़ी-रोटी को नष्ट करना न तो लोकतंत्र है और न ही जिम्मेदार राजनीतिक नेतृत्व।

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5 Nov 2026, 10:02 AM IST
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