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तमिलनाडु में मिली 5 हजार साल पुरानी शिलाचित्रों की खोज, चट्टानों पर दिखी मानव और हिरण की आकृति

तमिलनाडु के कल्लकुरिची जिले में करीब 5 हजार साल पुराने नवपाषाणकालीन शिलाचित्र मिले हैं। लाल गेरू से बनी मानव और हिरण की आकृतियां प्रागैतिहासिक शिकार की कहानी बयां करती हैं।
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भारत

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Anurag Animesh

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Updated: 5 Nov 2026, 4:00 AM IST

5000 Year Old Rock Paintings

तमिलनाडु में मिली 5 हजार साल पुरानी शिलाचित्रों की खोज

Neolithic Rock Paintings: कल्लकुरिची जिले के उलुंदूरपेट तालुक स्थित सीदेवी गांव में लगभग पांच हजार वर्ष पुराने नवपाषाणकालीन शिलाचित्रों की महत्वपूर्ण खोज हुई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, लाल गेरू से बनाए गए ये चित्र एक मानव आकृति और हिरण के माध्यम से संभवतः प्रागैतिहासिक शिकार गतिविधि को दर्शाते हैं।

अरिग्नार अन्ना गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज, विल्लुपुरम के इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर वी. विजयरंगम, शोधार्थी सी. इम्मैनुएल तथा पुरातात्विक उत्साही ए. कुलंथिराज ने सोमवार को सीदेवी गांव का सर्वेक्षण किया। इस दौरान गांव के निकट स्थित ‘सावडिक्कल’ नामक टीले पर दो बड़ी चट्टानों पर लाल गेरू से बने शिलाचित्र मिले।

जानें डिटेल्स


विजयरंगम के अनुसार, एक बड़ी चट्टान के मध्य लंबे सींगों वाले हिरण की आकृति उकेरी गई है। उसके सामने एक मानव आकृति दिखाई देती है, जिसका एक पैर जमीन पर और दूसरा ऊपर उठा हुआ है। आकृति के हाथ में हथियार जैसा कोई वस्तु भी दिखाई देती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह दृश्य संभवतः शिकार की घटना का चित्रण करता है।

उन्होंने बताया कि मानव आकृति की बाहरी रेखाएं गहरे लाल रंग से बनाई गई हैं, जबकि भीतर का भाग हल्के लाल रंग से भरा गया है। मुख्य चित्र के ऊपर और दाईं ओर एक छोटे हिरण की आकृति भी अंकित है। हालांकि आसपास मौजूद अन्य चित्र समय के प्रभाव के कारण स्पष्ट रूप से पहचाने नहीं जा सके हैं।

इतिहासकार क्या कहते हैं?


विजयरंगम और इम्मैनुएल ने चित्रों की शैली, संरचना और रंगों के आधार पर इन्हें लगभग 5,000 वर्ष पुराना तथा नवपाषाण काल का माना है। कला इतिहासकार के. टी. गांधीराजन का कहना है कि ये चित्र उत्तर नवपाषाण काल के कहे जा रहे हैं और इतनी स्पष्टता के साथ संरक्षित शिलाचित्र अत्यंत दुर्लभ हैं। उनके अनुसार हिरण की आकृति और उसके सींगों का चित्रण विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जबकि मानव आकृति बाद के समय में जोड़ी गई हो सकती है।

शोधकर्ताओं को टीले के आसपास काले-लाल तथा काले रंग के मिट्टी के बर्तनों के अवशेष भी मिले हैं। इम्मैनुएल ने बताया कि इस क्षेत्र में इस प्रकार के मिट्टी के बर्तनों के अवशेष पहली बार मिले हैं, जो हजारों वर्ष पहले यहां मानव बसावट की संभावना को मजबूत करते हैं।

इस खोज के साथ कल्लकुरिची जिले में शिलाचित्र स्थलों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। इससे पहले कलवरायन हिल्स और पडियान्थल क्षेत्रों में भी प्रागैतिहासिक शिलाचित्र खोजे जा चुके हैं।