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Mahua Moitra Case :कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को दी बड़ी राहत, गिरफ्तारी वारंट किया रद्द

Calcutta High Court News: कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट रद्द कर दिया है। कोर्ट ने मामले को नादिया की अदालत से बिधाननगर स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर करने का भी आदेश दिया है।
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Sep 07, 2026
Mahua Moitra
TMC MP Mahua Moitra (Photo-IANS)

TMC MP Mahua Moitra News : कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस की कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ पश्चिम बंगाल के नदिया जिले की एक अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को रद्द कर दिया। इतना ही नहीं जस्टिस देबांग्शु बसाक की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने संबंधित मामले को कृष्णानगर जिला अदालत के अधिकार क्षेत्र से हटाकर उत्तर 24 परगना जिले के बिधाननगर स्थित एमपी-एमएलए अदालत में ट्रांसफर कर दिया। इसने इस मामले में कृष्णानगर जिला अदालत के अन्य संबंधित आदेशों को भी रद्द कर दिया।

सेना और अमित शाह पर टिप्पणी को लेकर दर्ज हुआ था मामला

कृष्णानगर से दो बार सांसद रहीं मोइत्रा पर भारतीय सेना और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बारे में विवादास्पद और अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप था। इसके अलावा तुलसी की लकड़ी की माला, बुर्का और हिजाब पहनने वाली महिलाओं पर उनकी कुछ टिप्पणियों ने भी विवाद खड़ा कर दिया था। कृष्णानगर के एक निवासी ने सांसद के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। सांसद पर महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने, विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच संघर्ष भड़काने, धार्मिक भावनाओं को आहत करने और उन्हें डराने-धमकाने का आरोप था।

पेश नहीं होने पर जारी हुआ था गिरफ्तारी वारंट

कृष्णानगर अदालत ने इस मामले में मोइत्रा को कई बार समन भेजा था, लेकिन उनके पेश न होने पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। मोइत्रा ने गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया था और कोर्ट ने पिछली सुनवाई में वारंट के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

सांसद होने के कारण एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई की दलील

सोमवार दोपहर को मामले की फिर से सुनवाई हुई और इस बार डिवीजन बेंच ने वारंट रद्द कर दिया और संबंधित मामले को ट्रांसफर भी कर दिया। दरअसल, मोइत्रा के वकील अर्क नाग ने पहले यह सवाल उठाया था कि क्या कृष्णानगर अदालत को उनके खिलाफ मामले की सुनवाई का अधिकार है, क्योंकि वह एक सांसद हैं। उन्होंने तर्क दिया था कि उनके खिलाफ संबंधित मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए अदालत में होनी चाहिए। डिवीजन बेंच ने उनकी दलील स्वीकार कर ली।

Updated on:
07 Sept 2026 05:35 pm
Published on:
07 Sept 2026 05:32 pm
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