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‘पुलिस ड्राइविंग लाइसेंस जब्त कर सकती है लेकिन…’ DL मामले में हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

Calcutta High Court: कलकत्ता हाईकोर्ट ने ड्राइविंग लाइसेंस मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि ट्रैफिक पुलिस के पास किसी नागरिक का ड्राइविंग लाइसेंस जब्त करने का अधिकार है, लेकिन इसे रद्द करने का अधिकार केवल RTO के पास है।
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Jul 29, 2025
Calcutta High Court hearing on IAS IPS transfers in West Bengal
कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला (Photo - ANI)

कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने ड्राइविंग लाइसेंस (DL) को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जो वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ट्रैफिक पुलिस के पास किसी नागरिक का ड्राइविंग लाइसेंस जब्त करने का अधिकार है, लेकिन इसे निलंबित करने या रद्द करने का अधिकार केवल लाइसेंसिंग प्राधिकारी (RTO) के पास है। यह फैसला 24 जुलाई 2025 को न्यायमूर्ति पार्थसारथी चटर्जी की पीठ ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया।

क्या है मामला?

यह फैसला श्री पांडा नामक एक याचिकाकर्ता द्वारा दायर याचिका पर आया, जिन्होंने आरोप लगाया था कि एक ट्रैफिक सार्जेंट ने उनके ड्राइविंग लाइसेंस को अवैध रूप से जब्त किया और 1,000 रुपये का नकद जुर्माना मांगा। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि यह कार्रवाई मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 206 के तहत अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई थी। उन्होंने इसे "गैर-कानूनी, मनमानी और दुर्भावना से प्रेरित" बताया।

हाईकोर्ट का फैसला

जब्ती की शक्ति सीमित: कोर्ट ने कहा कि पुलिस लापरवाही से गाड़ी चलाने के मामले में ड्राइविंग लाइसेंस जब्त कर सकती है, लेकिन यह केवल प्रारंभिक कार्रवाई होगी। इसके बाद लाइसेंस को अदालत या लाइसेंसिंग प्राधिकारी को भेजना अनिवार्य है।

निलंबन/रद्द करने का अधिकार नहीं: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस के पास लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने की शक्ति नहीं है। यह अधिकार केवल RTO या संबंधित लाइसेंसिंग प्राधिकारी के पास है।

लिखित कारण जरूरी: कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना लिखित कारण के पुलिस न तो चालान काट सकती है और न ही लाइसेंस जब्त कर सकती है। सिर्फ संदेह के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।

प्रक्रियात्मक पारदर्शिता: यदि पुलिस लाइसेंस जब्त करती है, तो उसे मोटर वाहन अधिनियम की धारा 206(3) के तहत अस्थायी पावती (रसीद) देना अनिवार्य है।

कोर्ट के निर्देश

हाईकोर्ट ने इस फैसले की प्रति राज्य के गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक को भेजने का आदेश दिया है, ताकि ट्रैफिक पुलिस को इस बारे में जागरूक किया जाए और मनमानी कार्रवाइयों पर रोक लगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपना बचाव करता है, तो पुलिस उस पर जबरदस्ती अपराध स्वीकार करने का दबाव नहीं बना सकती।

वाहन चालकों के लिए राहत

यह फैसला वाहन चालकों के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि यह पुलिस की मनमानी और अवैध वसूली पर लगाम लगाएगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि चालकों को बेवजह परेशानी से भी बचाव मिलेगा।

नागरिकों के हक में फैसला

कलकत्ता हाईकोर्ट का यह फैसला ट्रैफिक पुलिस की शक्तियों को स्पष्ट करता है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है। यह सुनिश्चित करता है कि ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित कोई भी कार्रवाई कानून के दायरे में और पारदर्शी तरीके से हो।

Updated on:
29 Jul 2025 03:50 pm
Published on:
29 Jul 2025 11:01 am