
Chhota Rajan Passport Case: अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को 21 साल पुराने फर्जी पासपोर्ट मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। चेन्नई की विशेष CBI अदालत ने उसे फर्जी पहचान और जाली दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने का दोषी ठहराते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। छोटा राजन फिलहाल दिल्ली की हाई सिक्योरिटी तिहाड़ जेल में एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। यह मामला वर्ष 2002 में फर्जी दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट बनवाने से जुड़ा है।
यह मामला साल 2002 का है। सीबीआई ने 19 मार्च 2002 को छोटा राजन के खिलाफ केस दर्ज किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, उसने चेन्नई के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में फर्जी दस्तावेज जमा कर भारतीय पासपोर्ट हासिल किया था।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि छोटा राजन ने विजया कदम नाम से पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ उसने स्कूल का ट्रांसफर सर्टिफिकेट, राशन कार्ड, डिमांड ड्राफ्ट और अन्य दस्तावेज जमा किए जिन्हें जांच में फर्जी पाया गया। एजेंसी के अनुसार, विजया कदम के नाम से पासपोर्ट लेने वाला व्यक्ति वास्तव में राजेंद्र सदाशिव निखलजे उर्फ छोटा राजन था जिसने अपनी असली पहचान छिपाकर उम्र और पते से जुड़े नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।
मामले की जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 22 जनवरी 2004 को छोटा राजन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। करीब दो दशक तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब चेन्नई की विशेष सीबीआई अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए 7 साल के कठोर कारावास और 55 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
छोटा राजन का असली नाम राजेंद्र सदाशिव निखलजे है। वह मुंबई अंडरवर्ल्ड के सबसे चर्चित गैंगस्टरों में शामिल रहा है। एक समय वह भगोड़े अपराधी दाऊद इब्राहिम का करीबी माना जाता था लेकिन 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद दोनों के बीच मतभेद हो गए और उनके रास्ते अलग हो गए। इसके बाद दोनों गिरोहों के बीच सालों तक खूनी गैंगवार चला।
अक्टूबर 2015 में छोटा राजन को इंडोनेशिया के बाली से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे भारत लाकर अलग-अलग आपराधिक मामलों में मुकदमा चलाया गया। फिलहाल वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।