राष्ट्रीय

अमेरिका-ईरान युद्ध में चीन का बड़ा एक्शन, प्रेसिडेंट शी जिनपिंग बोले- किसी की जमीन पर आंख मत डालो…

Xi Jinping Statement: 28 फरवरी से शुरू हुआ युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। मिडिल-ईस्ट में टेंशन अब भी बरकरार है। इस बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने… नीचे पढ़ें पूरी अपडेट

2 min read
Apr 14, 2026
फोटो में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (सोर्स: पत्रिका.कॉम)

Middle East Peace Plan Xi Jinping: मिडिल ईस्ट में तनाव चरम है। 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है, शांति की कोशिशें भी अब तक नाकाम साबित हुई हैं। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई अहम वार्ता के फेल होने के बाद हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं। ऐसे में चीन ने अब बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है।

दरअसल, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति लाने के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भी इसे क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में अहम पहल बताया है। अब सवाल यह है कि क्या चीन की यह पहल युद्ध को रोक पाएगी या हालात और बिगड़ेंगे।
आइए जानते हैं चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के चार सूत्रीय शांति प्रस्ताव के बारे में…..

ये भी पढ़ें

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच भारत का बड़ा एक्शन, होर्मुज स्ट्रेट में फंसे 20,000 भारतीय नाविकों के लिए लॉन्च किया स्पेशल ऑपरेशन

पहला सूत्र: पड़ोसी हैं, दुश्मन नहीं

शी जिनपिंग ने सबसे पहले खाड़ी देशों से कहा कि आपस में मिलकर चलो। उनका कहना था कि खाड़ी के देश एक-दूसरे के करीबी पड़ोसी हैं, कहीं जाने वाले नहीं हैं। इसलिए इन देशों को आपसी रिश्ते सुधारने चाहिए और मिलकर एक साझा सुरक्षा ढांचा खड़ा करना चाहिए जो सबके लिए हो, टिकाऊ हो और व्यापक हो।

दूसरा सूत्र: किसी की जमीन पर आंख मत डालो

दूसरे बिंदु में जिनपिंग ने राष्ट्रीय संप्रभुता की बात की। उन्होंने कहा कि हर देश की अपनी सीमाएं, अपनी सुरक्षा और अपना वजूद होता है, और इसे हर हाल में माना जाना चाहिए। खाड़ी देशों की संप्रभुता और उनके लोगों, उनके दफ्तरों और उनकी संस्थाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।
यह बात ऐसे वक्त में अहम है जब इस इलाके में कई देशों की सीमाएं और संप्रभुता खतरे में दिखती है।

तीसरा सूत्र: संयुक्त राष्ट्र के नियम सबसे ऊपर

तीसरे प्रस्ताव में शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय कानून की बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका को बनाए रखना जरूरी है। कोई भी देश अपनी मनमर्जी से दूसरे देश पर नहीं चढ़ सकता। यूएन चार्टर के मकसद और सिद्धांत ही अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बुनियाद हैं।
जानकार मानते हैं कि यह बात परोक्ष रूप से उन ताकतों पर निशाना है जो बिना यूएन की मंजूरी के दूसरे देशों में दखल देती हैं।

चौथा सूत्र: विकास और सुरक्षा साथ-साथ चलें

चौथे और आखिरी बिंदु में जिनपिंग ने विकास और सुरक्षा को एक-दूसरे से जुड़ा बताया। उनका कहना था कि जब तक सुरक्षा नहीं होगी, विकास नहीं होगा। और जब विकास होगा, तभी असली सुरक्षा मिलेगी। चीन ने यह भी कहा कि वो खाड़ी देशों के साथ अपनी आधुनिकीकरण की यात्रा में साझेदारी को तैयार है। यानी चीन ने साफ संकेत दिया कि वो सिर्फ शांति का भाषण नहीं दे रहा, बल्कि आर्थिक साझेदारी के जरिए इस इलाके में अपनी पकड़ भी मजबूत करना चाहता है।

Also Read
View All