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भारत की सीमा पर बड़ी हलचल? चीन ने LAC के पास दुनिया के सबसे खतरनाक ड्रोन का किया परीक्षण, खासियत सबसे अलग

LAC Tension: चीन ने दुनिया का सबसे भारी कार्गो ड्रोन उड़ाकर बड़े-बड़े देशों की रातों की नींद उदा दी है। निश्चित तौर पर यह भारत के लिए भी चिंता का विषय है।
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Apr 05, 2026
pm modi CHINA DRON
चीन ने दुनिया का सबसे भारी कार्गो ड्रोन का किया सफल परीक्षण। सर्कल में पीएम मोदी और अमित शाह (सोर्स: RT en Español एक एक्स यूजर)

India-China Border Tension: दुनिया एक बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार तक उसने होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला तो वह भारी तबाही मचाएगा। उधर यूक्रेन-रसिया वॉर पिछले 4 साल से चल रहा है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान जंग लड़ रहे हैं। ऐसे में देखा जाए तो इंटरनेशनल लेवल पर शांति भंग नजर आ रही है।

लेकिन इस बीच चीन के कारनामे ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। उसने दुनिया के सबसे भारी कार्गो ड्रोन का सफल परीक्षण LAC सीमा के पास किया है। जो भारत के लिए चिंता का विषय है।

चीन के नए कार्गो ड्रोन का क्या है नाम?

चीन के नए कार्गो ड्रोन का नाम चांगयिंग-8 (CY-8) है, जिसे चीन की रक्षा कंपनी नोरिन्को ने बनाया है। खास बात यह है कि यह दुनिया का अब तक का सबसे भारी कार्गो ड्रोन बताया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इसने सिर्फ 280 मीटर लंबे छोटे रनवे से उड़ान भरी और करीब आधे घंटे बाद सुरक्षित लैंड भी कर लिया। यानी इसे कम जगह में भी आसानी से ऑपरेट किया जा सकता है।

CY-8 को खासतौर पर मुश्किल इलाकों…जैसे तिब्बत के ऊंचे पहाड़ों और समुद्री क्षेत्रों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। बताया जा रहा है, इसका वजन करीब 3.5 टन है और यह उतना ही वजन उठाने की क्षमता भी रखता है। कुल मिलाकर यह 7 टन तक के वजन के साथ उड़ सकता है। साथ ही इसमें बड़ा बंद कार्गो स्पेस दिया गया है, जिसमें आगे-पीछे दरवाजे हैं, ताकि सामान जल्दी लोड और अनलोड किया जा सके। ऐसे में माना जा रहा है कि यह ड्रोन सीमा क्षेत्रों में तेजी से भारी सामान या हथियार पहुंचाने में चीन की ताकत बढ़ा सकता है।

चीन की बढ़ती एआई ताकत

अमेरिका को पीछे छोड़ चीन के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही नई चिंताएं भी सामने आ रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, जो चीनी AI सिस्टम 2024 में सिर्फ 1% इस्तेमाल हो रहे थे, वे 2025 तक बढ़कर करीब 30% तक पहुंच गए हैं।

‘Alibaba’ जैसी बड़ी कंपनियों के साथ-साथ ‘DeepSeek’, ‘Moonshot AI’ और ‘MiniMax’ जैसे नए कंपनी भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उनके ये (AI) मॉडल सस्ते या मुफ्त होते हैं, इसलिए लोग इन्हें तेजी से अपना रहे हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि ये सिस्टम चीन के कानून के तहत काम करते हैं, जहां कंपनियों को सरकार के साथ डेटा साझा करना पड़ सकता है। इससे यूजर्स की निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन AI टूल्स के जरिए साइबर हमले, डेटा चोरी और गलत इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए सलाह दी गई है कि इन्हें पूरी तरह बैन करने के बजाय, कड़े नियम और पारदर्शिता लाना ज्यादा जरूरी है।

Updated on:
05 Apr 2026 08:23 pm
Published on:
05 Apr 2026 08:23 pm