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शोर में दम तोड़ती चहचहाहट, कुदरती संगीत पर ट्रैफिक का ब्रेक

Nature's Music आज के दौर की भागदौड़ और शोर में कुदरती संगीत कम होता जा रहा है। क्या है पूरा मामला? आइए जानते हैं।
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Aug 28, 2026
Vehicles
वाहन (Photo - ANI)

भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोगों में तनाव बढ़ रहा है। हालांकि सुबह-सुबह किसी पेड़ से आती पक्षी की मीठी चहचहाहट सुनने से तनाव मिनटों में गायब हो जाता है। प्रकृति का असर ही कुछ ऐसा है। लेकिन आधुनिक शहरों का बेकाबू हो रहा ट्रैफिक अब इस कुदरती मरहम को भी बेअसर बना रहा है। पर्यावरण मनोविज्ञान पर 'पीपल एंड नेचर' जर्नल में हाल ही में एक नई स्टडी रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। इस स्टडी रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि गाड़ियों और अन्य वाहनों का धीमा शोर भी पक्षियों की चहचहाट से मिलने वाले मनोवैज्ञानिक और शारीरिक फायदों को पूरी तरह बेअसर करने के लिए काफी होता है। जब प्राकृतिक आवाज़ में गाड़ियों और अन्य वाहनों की घरघराहट या हॉर्न का शोर घुलता है, तो दिमाग सुकून के बजाय तनाव का अनुभव करने लगता है।

जब बिगड़ी हृदय की गति

1,500 से ज़्यादा लोगों पर की गई स्टडी में अलग-अलग साउंडस्केप सुनाकर उनकी हृदय गति का विश्लेषण किया गया और इस आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई। इन रिपोर्ट में सामने आए परिणाम दर्शाते हैं कि पक्षियों की चहचहाहट मानसिक तनाव कम करने, मूड सुधारने और मानसिक थकान दूर करने में काफी ज़्यादा असरदार है। वहीँ दूसरी तरफ ट्रैफिक का हल्का शोर भी शरीर के 'स्ट्रेस रिस्पॉन्स' को बढ़ा देता है, जिससे तनाव बढ़ता है और साथ ही हृदय की गति भी बढ़ जाती है।

स्टडी से बेहतर परिणाम भी मिले

इस स्टडी से परिणाम मिले मिले। बेहतर सुनने की क्षमता के कारण युवाओं को बुज़ुर्गों की तुलना में बर्ड सॉन्ग से ज़्यादा सुकून मिला। जितनी अलग-अलग पक्षियों की आवाजें सुनी गईं, मानसिक शांति का स्तर उतना ही ज़्यादा दर्ज हुआ। जब ध्वनि का स्तर अत्यधिक उच्च था, तो मानसिक तनाव और झुंझलाहट का असर भी दोगुना हो गया।

ये होने चाहिए बदलाव

स्टडी के अनुसार कुछ बदलाव ज़रूरी हैं। पार्कों, बर्ड सेंचुरी और रिहायशी हरित क्षेत्रों के पास वाहनों की गति सीमा बहुत कम तय की जाए। पार्कों की बाहरी सीमाओं पर घनी झाड़ियाँ और ऊंचे पेड़-पौधे लगाए जाएं, जिससे वो सड़क के शोर को सोख सकें। प्रकृति से जुड़ने और तनाव भगाने के लिए पक्षियों की आवाज़ सुनना बिना खर्च वाला ज़रिया है और ऐसे में इसे अपनाएं।

Updated on:
28 Aug 2026 02:29 am
Published on:
28 Aug 2026 02:28 am