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एआइ के प्रयोग में पूर्वाग्रह और भेदभाव की आशंका, CJI बोले- कानूनी क्षेत्र में उपयोग के लिए सावधानी जरूरी

भारत और सिंगापुर के सुप्रीम कोर्ट की ओर से 'प्रौद्योगिकी और न्यायिक संवाद' विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में सीजेआइ ने जोर देते हुए कहा कि कोई भी अदालत के निर्णय में एआई के उपयोग के सवाल से बच नहीं सकता लेकिन यह सावधानी बरतने की जरूरत है कि ऐसे उपकरण न्याय की सार्वभौमिक खोज को कमजोर करने के बजाय इसे बढ़ाएं।

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Dhananjaya Yeshwant Chandrachud

देश के चीफ जस्टिस (सीजेआइ) डीवाई चंद्रचूड़ ने कानूनी पेशे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल से खतरों के प्रति चेताते हुए कहा है कि इसमें पूर्वाग्रह और परोक्ष भेदभाव की पूरी आशंका है। उन्होंने कहा कि अदालती कार्यवाही सहित सभी आधुनिक प्रक्रियाओं में एआई का उपयोग जटिल नैतिक, कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं को जन्म देता है। अदालती निर्णय में एआई का उपयोग अवसर और चुनौतियां दोनों प्रस्तुत करता है जिन पर बारीकी से विचार करने की जरूरत है।

सीजेआइ चंद्रचूड़ भारत और सिंगापुर के सुप्रीम कोर्ट की ओर से 'प्रौद्योगिकी और न्यायिक संवाद' विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि एआइ में पूर्वाग्रह और परोक्ष भेदभाव का रूप तब सामने आता है जब तटस्थ नीतियां या एल्गोरिदम कुछ समूहों को असमान रूप से प्रभावित करते हैं। इससे कुछ वंचित समूहों के अधिकार और सुरक्षा कमजोर हो जाती है।

उन्होंने इसके लिए चेहरा पहचान तकनीक (एफआरटी) के जोखिमों का उदाहरण दिया। सीजेआइ ने जोर दिया कि कोई भी अदालत के निर्णय में एआई के उपयोग के सवाल से बच नहीं सकता लेकिन यह सावधानी बरतने की जरूरत है कि ऐसे उपकरण न्याय की सार्वभौमिक खोज को कमजोर करने के बजाय इसे बढ़ाएं।

Updated on:
14 Apr 2024 02:29 pm
Published on:
14 Apr 2024 02:26 pm
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