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कैसे सोशल मीडिया से हुई CJP की शुरुआत? जिसके सामने झुक गई मोदी सरकार, शिक्षा मंत्री को देना पड़ा इस्तीफा

सोशल मीडिया के एक तंज से उपजी 'कॉकरोच जनता पार्टी' कैसे बनी युवाओं के आक्रोश का चेहरा? जानिए CJI सूर्यकांत की टिप्पणी से लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक की पूरी इनसाइड स्टोरी।
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Jul 25, 2026
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शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते CJP संस्थापक अभिजीत दीपके व अन्य। (फोटो: IANS)

Cockroach Janta Party: भारत में आमतौर पर राजनीतिक दलों की शुरुआत जन-आंदोलनों और जमीनी संघर्षों से होती है लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की कहानी इससे बिल्कुल अलग है। इस संगठन की शुरुआत किसी रैली या जनसभा से नहीं बल्कि 16 मई 2026 को सोशल मीडिया पर किए गए एक व्यंग्यात्मक पोस्ट से हुई थी। देखते ही देखते यह ऑनलाइन अभियान छात्रों के आंदोलन में बदल गया और नीट यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बीच बड़े स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। आखिर कॉकरोच जनता पार्टी कैसे अस्तित्व में आई, उसका आंदोलन कैसे बढ़ता गया और कैसे यह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक पहुंचा, आइए जानते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 15 मई 2026 को हुई। सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ युवा रोजगार न मिलने और अपने पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं। यह टिप्पणी सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई।

आलोचना के बाद CJI ने दी सफाई

विवाद बढ़ने पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी को गलत संदर्भ में पेश किया गया। उन्होंने कहा कि उनका इशारा उन लोगों की ओर था जो फर्जी डिग्रियों के सहारे वकालत, मीडिया और अन्य सम्मानित पेशों में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समाज के लिए परजीवी की तरह हैं और उनकी टिप्पणी का उद्देश्य बेरोजगार युवाओं का अपमान करना नहीं था।

सोशल मीडिया पर जन्मी कॉकरोच जनता पार्टी

मुख्य न्यायाधीश की सफाई के बावजूद 'कॉकरोच' शब्द सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड करने लगा। इसी बीच 16 मई को 30 वर्षीय अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक गूगल फॉर्म साझा किया। इसके जरिए उन्होंने लोगों को प्रतीकात्मक रूप से कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ने का न्योता दिया।

शुरुआत में यह एक व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियान था लेकिन देखते ही देखते हजारों युवा इससे जुड़ने लगे। बोस्टन यूनिवर्सिटी में मास्टर्स कर रहे अभिजीत दीपके की इस पहल को कुछ ही घंटों में 5,000 से अधिक रजिस्ट्रेशन मिले। बाद में कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाखों-करोड़ों लोग जुड़ने लगे और यह अभियान युवाओं के असंतोष का प्रतीक बन गया।

NEET विवाद के बाद शिक्षा आंदोलन में बदला अभियान

नीट यूजी 2026 पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद CJP ने अपने अभियान का फोकस शिक्षा व्यवस्था पर केंद्रित कर दिया। संगठन ने पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, परीक्षा से जुड़े तनाव के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के मामलों में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई।

6 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ धरना

6 जून 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना पहला बड़ा ऑफलाइन प्रदर्शन आयोजित किया। इसके साथ ही संगठन ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे इसमें देशभर के छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी और कई सामाजिक संगठनों के लोग शामिल होने लगे। सोशल मीडिया के जरिए आंदोलन को लगातार समर्थन मिलता गया और इसकी पहुंच देश के कई राज्यों तक फैल गई।

सोनम वांगचुक के जुड़ने से बढ़ी आंदोलन की ताकत

28 जून को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आंदोलन में शामिल हुए और छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनके जुड़ने के बाद आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान मिली। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई।

जंतर मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक (फाइल फोटो - आईएएनएस)

'चलो संसद' मार्च के दौरान बढ़ा तनाव

20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी ने 'चलो संसद' मार्च निकाला। हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़े लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आईं। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि हिंसा से जुड़े मामलों में एफआईआर भी दर्ज की गई। इसी दौरान CJP के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात भी की लेकिन बातचीत से कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।

सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों पर लाठी चार्ज करती पुलिस। (फाइल फोटो - आईएएनएस)

भूख हड़ताल से इस्तीफे तक

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बावजूद जंतर-मंतर पर धरना जारी रहा। इस बीच अभिजीत दीपके ने भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने पर टायफाइड होने की जानकारी सामने आई। 24 जुलाई को सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। उन्हें लिखित आश्वासन दिया गया कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा होगी और 20 जुलाई के प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

इसके अगले दिन यानि आज 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कॉकरोच जनता पार्टी ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी जीत बताया है। हालांकि संगठन ने साफ किया कि उसका आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। संगठन का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, कथित पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती तब तक उसका अभियान जारी रहेगा।

Updated on:
25 Jul 2026 04:23 pm
Published on:
25 Jul 2026 03:53 pm