अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ रद्द करने के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पवन खेड़ा का आरोप है कि 2 फरवरी की 'मिडनाइट कॉल' और 18 दिन की जल्दबाजी ने भारत को घाटे वाले व्यापार सौदे में फंसा दिया। क्या अडानी केस और एपस्टीन फाइलों के दबाव में हुआ यह समझौता? पूरी खबर पढ़ें।
"A One-Sided Anti-India Trade Deal": अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए ग्लोबल टैरिफ खत्म किए जाने के फैसले के बाद कांग्रेस मोदी सरकार पर हमलावर हो गई है। कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भारत ने अमेरिका के साथ "एकतरफा, भारत विरोधी ट्रेड डील" करने में जल्दबाजी की। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मामले में सरकार के तरीके पर सवाल उठाया और पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 फरवरी को वाशिंगटन को "देर रात कॉल" क्यों किया।
पवन खेड़ा ने कहा, "जल्दबाजी शैतान का काम है। अगर भारत ने सिर्फ 18 दिन और इंतजार किया होता, तो शायद हम खुद को एकतरफा, भारत विरोधी ट्रेड डील में नहीं फंसा पाते। भारत ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक प्रतीक्षा करने की अपनी शुरुआती रणनीति को क्यों त्याग दिया? क्या यह जनरल मनोज मुकुंद नरवणे द्वारा किया गया खुलासा है? क्या यह जेफरी एपस्टीन फाइलों का साया है? क्या यह गौतम अडानी से जुड़ा अमेरिकी आपराधिक मामला है? या फिर ये सभी कारण हैं? आज, कांग्रेस की बात सही साबित हुई है: नरेंद्र मोदी की स्थिति कमजोर (compromised) हो गई है।"
बता दें कि मोदी सरकार अमेरिका के साथ 2 फरवरी को ट्रेड डील को लेकर सहमत हुई थी। इसके बाद भारतीय एक्सपोर्ट पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया था। हालाकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी सरकार और ट्रंप प्रशासन दोनों के लिए एक मुश्किल कानूनी और डिप्लोमैटिक स्थिति पैदा कर दी है।
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तथाकथित ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया है। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए टैरिफ की घोषणा की है, जिसमें सेक्शन 122 के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ और सेक्शन 232 और 301 के तहत टैरिफ शामिल हैं।