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रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिकी दबाव काम करता हुआ दिखाई पड़ रहा है। दरअसल, भारत का रूस से वस्तुओं का आयात (Merchandise Imports) जनवरी 2026 में 40.48% घटकर 2.86 अरब डॉलर रह गया है। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2025 में रूस से भारत का आयात लगभग 4.81 बिलियन डॉलर था। यह ताजा आंकड़ा सोमवार को जारी किया गया। रूस से आयात में इस गिरावट की मुख्य वजह भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद में भारी कटौती बताई गई है।
आमतौर पर पेट्रोलियम क्रूड रूस से भारत के कुल आयात का लगभग 80% हिस्सा होता है। हालांकि मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, उस महीने (जनवरी 2026) रूसी कच्चे तेल का वास्तविक आयात लगभग 2.3 अरब डॉलर रहा, संभवतः इससे भी कम। फिलहाल सरकार की तरफ से जनवरी 2026 के व्यापार आंकड़े जारी कर दिए गए हैं, लेकिन बाय प्रोडक्ट और देशों के विस्तृत डेटा जारी नहीं किए गए हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत क्रूड ऑयल के अलावा रूस से कोयला, कोक, कुछ पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक, लोहा, न्यूजप्रिंट, प्रोजेक्ट से जुड़ा सामान, दालें, मोती तथा कीमती और अर्ध-कीमती पत्थरों का आयात भी करता है।
भारत ने अप्रैल 2025 में रूस से करीब 4.73 बिलियन डॉलर के तेल का आयात किया। यह वही महीना है जब अमेरिका की तरफ से 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया था। बाद में रूस से तेल खरीदने के चलते 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। इस तरफ भारतीय उत्पादों पर कुल 50 प्रतिशत टैक्स लगा। इसके बाद सितंबर में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटकर 3.32 बिलियन डॉलर हो गया। यह अप्रैल महीने से लगभग 30 फीसदी कम था।
हालांकि भारत-अमेरिका ट्रेड डील होने के बाद दोनों देशों के संबंधों में नरमी आई। इसके चलते अमेरिका ने भारत पर लगा 25 प्रतिशत टैरिफ हटाने का ऐलान किया। इसी दौरान ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। अमेरिका ने भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने का ऑफर दिया। दूसरी तरफ भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट रिफाइनर रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने जनवरी में एक न्यूज रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया 'एक्स' पर कहा था कि जनवरी में कंपनी को किसी भी रशियन क्रूड ऑयल की डिलीवरी की उम्मीद नहीं है।
अभी के लिए, भारत के पास तेल का पर्याप्त स्टॉक है। सरकार ने अमेरिका, यूएई, ईराक और मध्य-पूर्व के अन्य देशों से कच्चा तेल आयात बढ़ाकर इसकी भरपाई कर ली है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की तत्काल संभावना कम है, लेकिन अगर यह गिरावट लंबे समय तक रही तो अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर असर दिख सकता है।
Published on:
18 Feb 2026 11:23 am
