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वित्तीय सुरक्षा में मिडिल क्लास के लिए कौनसा विकल्प है बेहतर, इमरजेंसी फंड या हेल्थ इंश्योरेंस?

मेडिकल इमरजेंसी के दौर में केवल इमरजेंसी फंड पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत हेल्थ इंश्योरेंस, उचित बेस कवर और सुपर टॉप अप जैसे प्लान वित्तीय सुरक्षा की बेहतर रणनीति है।

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भारत

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Thalaz Sharma

Feb 17, 2026

emergency fund vs health insurance

प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: AI)

Emergency Fund VS Health Insurance: बढ़ती महंगाई और महंगे इलाज के दौर में मिडिल क्लास परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल वित्तीय सुरक्षा का है। एक ओर इमरजेंसी फंड अचानक आने वाले खर्चों में सहारा देता है, तो दूसरी ओर हेल्थ इंश्योरेंस बड़े मेडिकल बिलों से सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे में असली बहस यह है कि सीमित आय वाले परिवारों के लिए कौन सा विकल्प ज्यादा भरोसेमंद और टिकाऊ साबित हो सकता है।

सेल्स टीम और क्लेम प्रोसेस करने वाली टीम में नहीं होता सामंजस्य

हेल्थ इंश्योरेंस में सबसे बड़ी समस्या एक्सपेक्टेशन मिसमैच की मानी जाती है। पॉलिसी बेचने वाली सेल्स टीम और क्लेम प्रोसेस करने वाली टीम के लक्ष्य अलग-अलग होते हैं। सेल्स एजेंट आकर्षक लाभ और अनलिमिटेड सम इंश्योर्ड जैसे शब्दों से ग्राहकों को प्रभावित करते हैं, लेकिन क्लेम के समय शर्तों की सख्ती सामने आती है। कंपनी का फोकस लागत नियंत्रित करने पर रहता है, जिससे ग्राहक को निराशा होती है। यही अंतर मिडिल क्लास परिवारों के लिए जोखिम पैदा करता है, क्योंकि सीमित बचत के बीच क्लेम रिजेक्शन या कम भुगतान उनकी वित्तीय योजना को झटका दे सकता है।

फाइन प्रिंट और पॉलिसी की जटिल शर्तें

मिडिल क्लास उपभोक्ता अक्सर पॉलिसी के फाइन प्रिंट को पूरी तरह नहीं समझ पाते। रूम रेंट कैप, सब लिमिट, डिडक्टिबल और को पेमेंट क्लॉज जैसी शर्तें अंतिम क्लेम राशि को काफी कम कर सकती हैं। खासकर सीनियर सिटिजन पॉलिसी में ये नियम ज्यादा सख्त होते हैं। थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर यानी टीपीए अस्पताल और इंश्योरर के बीच समन्वय करते हैं, लेकिन प्रक्रिया इतनी औपचारिक है कि छोटी डॉक्युमेंटेशन गलती भी क्लेम रिजेक्शन का कारण बन सकती है। ऐसे में सही जानकारी और पॉलिसी की तुलना करना बेहद जरूरी हो जाता है।

इमरजेंसी फंड या हेल्थ इंश्योरेंस, किसे चुनें?

दस लाख रुपये का हेल्थ कवर और दस लाख की बचत समान नहीं माने जा सकते। इंश्योरेंस कवर हर साल रिन्यू होता है और बड़े अस्पताल खर्च को संभाल सकता है, जबकि इमरजेंसी फंड एक बार खर्च होने पर खत्म हो सकता है। हालांकि छोटे या अचानक होने वाले खर्चों के लिए इमरजेंसी फंड जरूरी है। बेहतर रणनीति यह मानी जाती है कि पहले छह से बारह महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड तैयार किया जाए, फिर पर्याप्त बेस कवर के साथ 'सुपर टॉप अप' जैसा प्लान लिया जाए। मेट्रो सिटी में बढ़ती इलाज लागत को देखते हुए यह संतुलित मॉडल मिडिल क्लास के लिए ज्यादा सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है।