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Health Insurance Viral : ‘हम से पूछ कर पॉलिसी खरीदी थी क्या!’ 50,000 रुपये सालाना प्रीमियम के बाद भी नहीं मिला क्लेम

एक व्यक्ति द्वारा 50,000 रुपये सालाना प्रीमियम भरने के बावजूद मां के इलाज का क्लेम खारिज होने का मामला सामने आया है। दावा है कि क्लेम खारिज करने वाली कंपनी स्टार हेल्थ इंश्योरेंस है।

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भारत

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Thalaz Sharma

Feb 16, 2026

Health Insurance claim rejected viral video

प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: AI)

Health Insurance Scam: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। हमारे देश में हेल्थ इंश्योरेंस को आर्थिक सुरक्षा का मजबूत जरिया माना जाता है और लोग हर साल भारी प्रीमियम भरकर उम्मीद करते हैं कि जरूरत के समय कंपनी साथ देगी। लेकिन लखनऊ के एक व्यक्ति का क्लेम खारिज होने का मामला सामने आने के बाद इस भरोसे पर सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

बताया गया है कि व्यक्ति अपनी मां की हेल्थ पॉलिसी के लिए हर साल लगभग 50,000 रुपये प्रीमियम भर रहा था। जब उनकी मां बीमार पड़ीं तो इलाज के लिए उसने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी (STAR HEALTH) के हजरतगंज, लखनऊ वाले कार्यालय से संपर्क किया। आरोप है कि उसे कई घंटों तक इंतजार कराया गया और अंत में क्लेम को अस्वीकार कर दिया गया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उसकी पोस्ट वायरल हो गई, जिसमें उसने दावा किया कि एक एजेंट ने यह तक कह दिया किz। इस घटना ने हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर की कार्यप्रणाली पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।

स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की प्रतिक्रिया

विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी। स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी (STAR HEALTH) ने कहा कि दस्तावेजों और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर सभी क्लेम के निर्णय लिए जाते हैं। कंपनी के अनुसार यदि पॉलिसी लेते समय किसी प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारी साझा नहीं की जाती, तो नियमों के तहत क्लेम अस्वीकार किया जा सकता है।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक मामले में समीक्षा और शिकायत निवारण की प्रक्रिया उपलब्ध होती है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है। हालांकि कार्यालय में व्यवहार संबंधी आरोपों पर कंपनी ने कोई विशेष टिप्पणी नहीं की।

पॉलिसी धारकों को क्या करना चाहिए?

हेल्थ इंश्योरेंस एक कानूनी अनुबंध होता है, जिसमें ग्राहक को मेडिकल हिस्ट्री की सही जानकारी देना अनिवार्य होता है। यदि लिखित दस्तावेज और मौखिक जानकारी में अंतर पाया जाता है तो विवाद की स्थिति बन सकती है। ऐसे मामलों में ग्राहक पहले कंपनी के आंतरिक शिकायत तंत्र का उपयोग कर सकते हैं।

यदि समाधान न मिले तो वे इंश्योरेंस ओम्बड्समैन यानी उच्च अधिकारी के पास भी जा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पॉलिसी खरीदते समय सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ना और प्रस्ताव फॉर्म में दी गई जानकारी की जांच करना बेहद जरूरी है।