कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस देकर आरोप लगाया कि महिला आरक्षण विधेयक पर राष्ट्र संबोधन में विपक्ष पर टिप्पणी संसद की मर्यादा के खिलाफ है। अब ओम बिरला के फैसले पर सबकी नजर टिकी है।
Congress Gives privilege Notice Against PM Modi: देश की राजनीति में एक बार फिर से संसद की गरिमा और विशेषाधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। इस बार मामला सीधे प्रधानमंत्री जुड़ा है। कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दिया। पार्टी का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने संसद की कार्यवाही से जुड़ी बातों को बाहर लाकर विपक्ष पर टिप्पणी की और उनपर कई आरोप भी लगाए, जो नियमों के खिलाफ है। अगर लोकसभा अध्यक्ष इस नोटिस को स्वीकार करते हैं, तो मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सकता है, जहां इसकी विस्तार से जांच होगी।
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा के नियम 222 के तहत यह नोटिस दिया है। उनका कहना है कि 17 अप्रैल को महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो पाया। इसके अगले दिन प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित किया और अपने भाषण में विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए। वेणुगोपाल का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने न सिर्फ विपक्ष की आलोचना की, बल्कि यह भी संकेत दिया कि उन्होंने किस तरह मतदान किया और उनके इरादे क्या थे। कांग्रेस इसे संसद के विशेषाधिकार का सीधा उल्लंघन मान रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि संसद के अंदर जो भी बहस या भाषण होते हैं, उन्हें बाहर उसी रूप में उठाकर टिप्पणी करना ठीक नहीं माना जाता। यह एक संसद के परंपरा के खिलाफ है। उनका तर्क है कि सांसद अपने क्षेत्र और जनता की चिंताओं को ध्यान में रखकर वोट देते हैं, ऐसे में उनके इरादों पर सवाल उठाना अनुचित है।
वेणुगोपाल ने अपने पत्र में यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन आमतौर पर बहुत खास मौकों पर होता है और उसका उद्देश्य देश को एकजुट करना होता है। लेकिन इस बार, उनके मुताबिक, इसका इस्तेमाल विपक्ष पर हमला करने के लिए किया गया। कांग्रेस इसे सत्ता का दुरुपयोग बता रही है और मांग कर रही है कि इस मामले की जांच लोकसभा की विशेषाधिकार समिति से कराई जाए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में महिला आरक्षण बिल का जिक्र करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि इस बिल का विरोध करना महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है और इसके लिए विपक्ष को जनता, खासकर महिलाएं, जवाब देंगी। उन्होंने महिलाओं से माफी भी मांगी कि सरकार बिल पास नहीं करा पाई, लेकिन साथ ही भरोसा दिलाया कि महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रयास जारी रहेंगे।