छात्रों के लिए दिल्ली दुनिया का सबसे किफायती शहर बन गया है। हाल ही में इसका खुलासा हुआ है।
दिल्ली को विश्व का सबसे किफायती छात्र शहर घोषित कर दिया गया है। इस सूची में मुंबई 11वें और बेंगलुरु 15वें स्थान पर हैं। ट्यूशन फीस, रहने का खर्च और क्रय शक्ति के मामले में भारतीय शहर ब्रिटेन, अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे पारंपरिक गंतव्यों की तुलना में काफी ज़्यादा अनुकूल हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय छात्रों और उनके परिवारों के निर्णयों को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक बन गया है। यूएस बेस्ट स्टूडेंट सिटीज 2026 रैंकिंग में यह तथ्य सामने आए हैं। इस मूल्यांकन में 150 शहरों को शामिल किया गया और अलग-अलग पैमानों पर उन्हें आंका गया।
जयपुर, चंडीगढ़ ट्राइसिटी, कोच्चि और गोवा जैसे टियर-2 शहर 'रणनीतिक सीमांत' के रूप में उभरे हैं। ये शहर बड़े निरंतर भूखंड, कम परिचालन लागत और चरणबद्ध या विशिष्ट कैंपस मॉडल के लिए उपयुक्त हैं। चंडीगढ़ उत्तर भारत का शिक्षा केंद्र है जिसमें दिल्ली की निकटता और नियोजित शहरी संरचना का फायदा है। कोच्चि में टेक-आईटी सेक्टर बढ़ रहा है, जबकि गोवा अंतरराष्ट्रीय पहचान और आवासीय कैंपस के लिए उपयुक्त भूमि प्रदान करता है।
भारत में 18 से 23 वर्ष के आयु वर्ग में 15.5 करोड़ लोग हैं, जो इस आयु वर्ग में दुनिया की सबसे बड़ी आबादी है। इसके चलते भारत अब विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए अपने कैंपस के विस्तार को लेकर सबसे रणनीतिक बाजार बन गया है। अब तक 18 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट या पंजीकरण प्रमाणपत्र मिल चुका है, जिसमें से तीन पहले से ही परिचालन में हैं। डेलॉयट और नाइट फ्रैंक की संयुक्त रिपोर्ट 'इंडियाज़ 155 मिलियन स्टूडेंट मैंडेट 2026' के अनुसार वैश्विक विश्वविद्यालय के विस्तार के लिए भारत की ओर तेज़ी से रुख करने के पीछे यह प्रमुख कारण है।