एच.डी. देवगौड़ा ने लिखा, 'मेरे प्रिय मित्र मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद में मेरे 'प्रेम' कांग्रेस और 'विवाह' भाजपा पर मजाकिया टिप्पणी की। अगर 'शादी' की भाषा में जवाब दें, तो कांग्रेस के साथ मेरी 'जबरदस्ती की शादी' हुई थी, लेकिन अपमानजनक रिश्ते के कारण मुझे 'तलाक' देना पड़ा।'
HD Deve Gowda Reply Mallikarjun Kharge: राज्यसभा में बुधवार को रिटायर हो रहे 59 सांसदों की विदाई के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा पर मजाकिया कटाक्ष किया। खरगे ने कहा, 'मैं देवगौड़ा जी को 54 साल से जानता हूं। उन्होंने हमारे साथ मोहब्बत की, लेकिन शादी मोदी साहब के साथ कर ली।' इस टिप्पणी पर सदन में ठहाके गूंजे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुस्कुराए।
देवगौड़ा उस समय सदन में मौजूद नहीं थे, क्योंकि उन्हें उगादी समारोह के लिए बेंगलुरु जाना था। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पत्र साझा कर हल्के-फुल्के लेकिन तथ्यपूर्ण अंदाज में जवाब दिया। देवगौड़ा ने लिखा, 'मेरे प्रिय मित्र मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद में मेरे 'प्रेम' कांग्रेस और 'विवाह' भाजपा पर मजाकिया टिप्पणी की। अगर 'शादी' की भाषा में जवाब दें, तो कांग्रेस के साथ मेरी 'जबरदस्ती की शादी' हुई थी, लेकिन अपमानजनक रिश्ते के कारण मुझे 'तलाक' देना पड़ा।'
पत्र में देवगौड़ा ने 2018 की कर्नाटक राजनीति का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने गुलाम नबी आजाद को भेजकर एच.डी. कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद की पेशकश की थी। देवगौड़ा ने विरोध जताया और खरगे को मुख्यमंत्री बनाने की सलाह दी, लेकिन कांग्रेस ने कुमारस्वामी पर जोर दिया। 2019 में कांग्रेस ने गठबंधन तोड़ दिया और कई विधायक भाजपा में शामिल हो गए। देवगौड़ा ने कहा, 'अगर कांग्रेस ने दलबदल करने वालों पर कार्रवाई की होती, तो आज खरगे जी कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में बेहतर स्थिति में होते।'
देवगौड़ा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कांग्रेस गठबंधन को नहीं छोड़ा, बल्कि कांग्रेस ने उन्हें छोड़ दिया। उन्होंने मुझे 'तलाक' देने और स्थिर गठबंधन की तलाश करने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा। उन्होंने खरगे को 'ईमानदार व्यक्ति' बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें बढ़ने नहीं दिया, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मान और प्यार दिया।
जनता दल (सेक्युलर) लंबे समय से कांग्रेस के साथ गठबंधन में रही है, लेकिन हाल के वर्षों में देवगौड़ा के बयानों में बदलाव आया है। खरगे की टिप्पणी सदन में हंसी का कारण बनी, जबकि देवगौड़ा का जवाब हास्यपूर्ण लेकिन गंभीर तथ्यों से भरा है। यह कर्नाटक की पुरानी राजनीतिक यादों और वर्तमान गठबंधनों पर प्रकाश डालता है।