
Form 6 SIR Declaration: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग ने एक बार फिर अपने फैसले में बदलाव किया है। आयोग ने उन राज्यों में ऑनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म 6 से SIR से जुड़ा जरूरी डिक्लेरेशन कॉलम हटा दिया है, जहां अभी SIR की प्रक्रिया जारी है। यह डिक्लेरेशन अब फॉर्म 6 का हिस्सा नहीं होगा, बल्कि इसे अलग डॉक्यूमेंट के तौर पर उपलब्ध कराया जाएगा।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से उठाई गई आपत्तियों के बाद हुआ है। दोनों आयुक्तों ने पहले इस घोषणा-पत्र को फॉर्म 6 में शामिल किए जाने पर सवाल उठाए थे। 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में चुनाव आयोग ने बताया था कि 21 अक्टूबर को इलेक्टोरल रोल (ER) डिवीजन ने दोनों दस्तावेजों को अलग करने का फैसला लिया था।
ऑनलाइन फॉर्म 6 का इस्तेमाल नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए किया जाता है। पहले, फॉर्म के सेक्शन J और K के बीच SIR से जुड़ा एक एडिशनल डिक्लेरेशन शामिल किया गया था। एप्लिकेंट्स को तीन ऑप्शन में से एक चुनना था।
एप्लिकेंट्स इस डिक्लेरेशन का जवाब दिए बिना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रोसेस आगे नहीं बढ़ा सकते थे। कमीशन ने अब इसे फॉर्म 6 से हटा दिया है। यह डिक्लेरेशन अब पोर्टल पर एक स्टैंडअलोन डॉक्यूमेंट के तौर पर उपलब्ध है।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्शन कमिश्नर विवेक जोशी ने 16 मई को इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने तर्क दिया कि फॉर्म 6 में ऐसा बदलाव बिना किसी कानूनी बदलाव के लागू नहीं किया जा सकता। इसके बाद 13 अगस्त को इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू ने इस कदम को अनऑथराइज़्ड और गैर-कानूनी बताया और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। संधू ने कहा कि फॉर्म 6 का फॉर्मेट रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स 1960 के तहत तय है और इसे बदलने का अधिकार पूरी तरह से केंद्र सरकार के पास है। फिर भी यह डिक्लेरेशन फॉर्म जुलाई में ही फॉर्म 6 के ऑनलाइन वर्जन में शामिल कर लिया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्शन कमीशन ने छह हफ्तों में फॉर्म 6 को लेकर तीन अलग-अलग रुख अपनाए। 23 सितंबर को इस मामले पर रिपोर्ट सामने आने के बाद आयोग ने प्रेस नोट जारी किया था। इसमें कहा गया था कि आयोग के सभी फैसले कानून और उसके निर्देशों के अनुरूप हैं और पिछले एक साल में लिए गए सभी महत्वपूर्ण फैसले पूरे आयोग की सहमति से लिए गए हैं।
इसके तीन दिन बाद, 26 सितंबर को पूर्ण आयोग की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि SIR के लिए फॉर्म 6 के साथ जोड़े गए डिक्लेरेशन फॉर्म को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। हालांकि, 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने संशोधित फॉर्म 6 को न तो मंजूरी दी थी और न ही उसे खारिज किया था।
इसके बाद 21 अक्टूबर को चुनाव आयोग के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन (ER) डिवीजन ने डिक्लेरेशन फॉर्म को फॉर्म 6 से अलग करने का निर्णय लिया। अब इसे ऑनलाइन पोर्टल पर एक अलग डॉक्यूमेंट के तौर पर दिखाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में चुनाव आयोग ने बताया कि SIR से संबंधित डिक्लेरेशन फॉर्म को फॉर्म 6 में आवेदकों की सुविधा के लिए शामिल किया गया था। आयोग के अनुसार, दोनों दस्तावेजों को एक साथ रखने से आवेदक को केवल एक OTP और एक ई-सिग्नेचर की जरूरत होगी, नहीं तो इस प्रोसेस के लिए दो अलग-अलग OTP और दो ई-सिग्नेचर की जरूरत होती।
हालांकि, आयोग ने हलफनामे में यह भी स्वीकार किया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डिक्लेरेशन फॉर्म को जिस तरीके से दिखाया गया था, उससे ऐसा लग सकता था कि फॉर्म 6 में बदलाव कर दिया गया है। आयोग ने कहा कि फॉर्म 6 में संशोधन केवल केंद्र सरकार ही कर सकती है।