PMLA : पीएमएलए कोर्ट ने हाल ही 14 अटैच एफडी को एसेट डिस्पोजल कमेटी (एडीसी) को ट्रांसफर करने को कहा था। इससे ईडी को पीएमएलए की धारा 8(8) के तहत पीडि़तों को रकम लौटाने का रास्ता मिल गया है। कोर्ट ने कहा था कि ईडी की तरफ से जब्त संपत्तियों को उन दावेदार को वापस किया जा सकता है, जिन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग अपराध के कारण भारी नुकसान उठाया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) घोटाले के पीडि़तों को रकम लौटाने की तैयारी कर रहा है। इसकी शुरुआत कोलकाता में 12 करोड़ रुपए बांट कर की जाएगी। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक केंद्रीय एजेंसी कोलकाता की रोज वैली ग्रुप ऑफ कंपनीज की अटैच की गई 11.99 करोड़ रुपए की एफडी को 22 लाख लोगों में बांटेगी। आरोपी कंपनियों ने जमाकर्ताओं को भारी रिटर्न का वादा कर धन डिपॉजिट कराया था।
पीएमएलए कोर्ट ने हाल ही 14 अटैच एफडी को एसेट डिस्पोजल कमेटी (एडीसी) को ट्रांसफर करने को कहा था। इससे ईडी को पीएमएलए की धारा 8(8) के तहत पीडि़तों को रकम लौटाने का रास्ता मिल गया है। कोर्ट ने कहा था कि ईडी की तरफ से जब्त संपत्तियों को उन दावेदार को वापस किया जा सकता है, जिन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग अपराध के कारण भारी नुकसान उठाया।
सबसे पहले अटैच संपत्ति ट्रांसफर करने के लिए ईडी को पंचनामा तैयार करना होगा। कलकत्ता हाईकोर्ट ने इससे पहले एडीसी गठित करने के निर्देश दिए थे, जिसकी अगुवाई पूर्व जस्टिस दिलीप कुमार सेठ करेंगे। पीएमएलए कोर्ट ने कहा था कि भले ट्रायल के बाद आरोपी बरी हो जाएं, निवेशकों को उनका पैसा वापस मिलेगा।
लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि ईडी की तरफ से जब्त संपत्तियों से पीडि़तों की मदद के लिए कानूनी रास्ता तलाशा जा रहा है। मई में एक इंटरव्यू में भी उन्होंने जब्त राशि को गरीबों में बांटने का जिक्र करते हुए कहा था, मैं इस पर काफी काम कर रहा हूं, क्योंकि लगता है कुछ लोगों ने पद का गलत इस्तेमाल कर गरीबों का रुपया लूटा। उन्हें वह वापस मिलना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपए के राशन वितरण मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने पांच शेल कंपनियों का पता लगाया है। इनका इस्तेमाल कथित घोटाले में पैसे की हेराफेरी के लिए किया गया। सूत्रों ने बताया कि इन पांचों कॉरपोरेट इकाइयों के बीच कई चीजें समान हैं। ये सभी मध्य कोलकाता के स्ट्रैंड रोड स्थित एक ही भवन परिसर के एक ही पते पर पंजीकृत हैं। दूसरा सामान्य कारक यह है कि ये सभी पांच संस्थाएं सीधे तौर पर या तो राज्य के पूर्व खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक या उनके किसी करीबी पारिवारिक रिश्ते से जुड़ी हुई हैं। सूत्रों के अनुसार, तीसरा सामान्य कारक यह है कि 2016 और 2021 के बीच इन कथित कॉर्पोरेट संस्थाओं के बैंक खातों में एक ही स्रोत से मोटी रकम जमा की गई।