भाजपा के पूर्व सांसद ने 'पत्रिका' से कहा कि देश में एससी-एसटी की आबादी 22.5 प्रतिशत है। अगर यह वर्ग विकास में पीछे छूटा तो देश पिछड़ जाएगा।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति (एससी) और जनजाति (एसटी)आयोग के चेयरमैन रहे और भाजपा के पूर्व सांसद डॉ. विजय सोनकर शास्त्री ने आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि वर्गीकरण से एससी-एसटी आरक्षण का लाभ उन जातियों को भी मिल सकेगा, जो अब तक वंचित रहीं हैं। केंद्र की मोदी सरकार की तरह राज्यों को भी वंचित तबके तक लाभ पहुंचाने का रास्ता खोजना चाहिए।
डॉ. शास्त्री ने 'पत्रिका' से कहा कि देश में एससी-एसटी की आबादी 22.5 प्रतिशत है। अगर यह वर्ग विकास में पीछे छूटा तो देश पिछड़ जाएगा। इसलिए सभी को फैसले का स्वागत करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नई व्यवस्था लागू करने में कुछ दिक्कतें भले आएंगी, लेकिन इससे आरक्षण का लाभ समाज के वंचित लोगों को भी मिल सकेगा। देश में आरक्षण की मंशा इसीलिए नहीं पूरी हुई, क्योंकि कुछ ही लोग लाभ लेते रहे।
शास्त्री ने क्रीमीलेयर के बारे में कहा कि दलितों को आर्थिक आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक-राजनीतिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के आधार पर संविधान ने आरक्षण दिया है। एक दलित डॉक्टर-इंजीनियर बन जाते हैं तो भी उनकी समाज में पहचान दलित के रुप में ही होती है। ऐसे में दलितों के मामले में आर्थिक आधार पर क्रीमीलेयर का निर्धारण जटिल मसला हो जाता है। केंद्र की मोदी सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के साथ कार्य रही है। राज्य सरकारों को भी इस भावना के साथ कोई न कोई रास्ता निकालना होगा।
शास्त्री ने कहा कि दलितों में कुल 1208 जातियां और 10 हजार उपजातियां हैं। ऐसे में वर्गीकरण बड़ी चुनौती है। वर्गीकरण के लिए निजी और सरकारी सेवाओं में एससी-एसटी की भागीदारी पर सर्वे के बाद श्रेणियां बनाई जा सकती हैं।