
Friendship Day 2026 Story: जिंदगी में एक सच्चा दोस्त होना किसी बड़ी दौलत से कम नहीं माना जाता। मुश्किल वक्त में साथ खड़ा रहने वाला और खुशियों को दोगुना कर देने वाला दोस्त हर किसी की जिंदगी को खास बना देता है। इसी अनमोल रिश्ते का सम्मान करने के लिए हर साल फ्रेंडशिप डे (Friendship Day) मनाया जाता है। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि इस दिन की शुरुआत कैसे हुई और भारत में इसे अगस्त के पहले रविवार को ही क्यों मनाया जाता है। आपको बताते हैं फ्रेंडशिप डे का पूरा इतिहास।
फ्रेंडशिप डे की शुरुआत का विचार सबसे पहले 1930 में अमेरिका में सामने आया। मशहूर ग्रीटिंग कार्ड कंपनी हॉलमार्क (Hallmark) के संस्थापक जॉयस हॉल (Joyce Hall) ने सुझाव दिया कि जिस तरह परिवार और प्रेम संबंधों के लिए खास दिन होते हैं, उसी तरह दोस्तों के नाम भी एक दिन होना चाहिए।
उनका उद्देश्य था कि लोग इस दिन अपने दोस्तों को ग्रीटिंग कार्ड, शुभकामनाएं और छोटे-छोटे उपहार देकर अपने रिश्ते को और मजबूत बनाएं। हालांकि शुरुआती दौर में यह विचार लोगों के बीच ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो सका और धीरे-धीरे इसकी चर्चा कम हो गई।
करीब 3 दशक बाद 1958 में दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे में इस विचार को नई दिशा मिली। डॉक्टर रेमन आर्टेमियो ब्राचो अपने दोस्तों के साथ एक बैठक में थे, जहां उन्होंने ऐसा दिन मनाने का प्रस्ताव रखा जो पूरी तरह दोस्ती, भाईचारे और आपसी विश्वास को समर्पित हो। इसी सोच के साथ वर्ल्ड फ्रेंडशिप क्रूसेड (World Friendship Crusade) नामक संगठन की स्थापना हुई। इस संस्था ने दुनिया भर में दोस्ती का संदेश फैलाने का अभियान शुरू किया और 30 जुलाई को फ्रेंडशिप डे के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।
दोस्ती के महत्व को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) ने 2011 में 30 जुलाई को आधिकारिक तौर पर इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे( International Friendship Day) घोषित किया। संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य केवल दोस्तों का सम्मान करना नहीं था, बल्कि अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और समुदायों के बीच शांति, सहयोग, आपसी सम्मान और संवाद को बढ़ावा देना भी था। इसके बाद कई देशों ने 30 जुलाई को आधिकारिक फ्रेंडशिप डे के रूप में मनाना शुरू कर दिया।
भारत में फ्रेंडशिप डे 30 जुलाई की बजाय अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है। इसके पीछे कोई सरकारी नियम या आधिकारिक घोषणा नहीं है। दरअसल, रविवार होने की वजह से लोगों के पास छुट्टी रहती है और वे अपने दोस्तों के साथ समय बिता सकते हैं। इसी कारण धीरे-धीरे यह परंपरा लोकप्रिय होती गई। फिल्मों, टीवी कार्यक्रमों, ग्रीटिंग कार्ड कंपनियों और बाद में सोशल मीडिया ने भी इस तारीख को लोगों के बीच व्यापक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। आज भारत के अधिकांश लोग इसी दिन फ्रेंडशिप डे मनाते हैं।
समय के साथ फ्रेंडशिप डे का स्वरूप भी बदल गया है। यह दिन खासकर युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। स्कूल, कॉलेज और ऑफिस में दोस्त एक-दूसरे को फ्रेंडशिप बैंड बांधते हैं, गिफ्ट, चॉकलेट और ग्रीटिंग कार्ड देते हैं। वहीं सोशल मीडिया पर लोग अपने दोस्तों के साथ तस्वीरें, वीडियो और यादगार पल साझा कर उन्हें खास महसूस कराते हैं। कई लोग इस मौके पर पुराने दोस्तों से दोबारा संपर्क करते हैं और रिश्तों को नई शुरुआत देते हैं।