राष्ट्रीय

‘सैन्य ताकत से नहीं, कूटनीति से सुलझेंगे युद्ध’, अटलांटा G20 में बोले जयशंकर, ग्लोबल साउथ पर ऊर्जा संकट का उठाया मुद्दा

G20 Foreign Ministers Meeting: अमेरिका के अटलांटा में हुई G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि वैश्विक संघर्षों को सैन्य तरीकों से हल नहीं किया जा सकता और इसके लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाना जरूरी है। उन्होंने ऊर्जा संकट से ग्लोबल साउथ के प्रभावित होने का मुद्दा भी उठाया।
2 min read
• •
Updated: 1 Nov 2026, 9:35 AM IST
S Jaishankar news
एस. जयशंकर(फोटो-IANS)

G20 Atlanta meeting: अमेरिका के अटलांटा में आयोजित G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के समापन पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बताया कि इस मीटिंग में ग्लोबल जियोपॉलिटिकल माहौल, एनर्जी और फ़ूड सिक्योरिटी और सप्लाई चेन समेत कई जरूरी मुद्दों पर गहरी चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि बैठक तीन मुख्य सत्रों में बंटी थी। पहले दिन के दो सत्रों में वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति और दुनिया भर में गहराते खाद्य व ऊर्जा संकट पर ध्यान केंद्रित किया गया। दूसरे दिन का मुख्य एजेंडा अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत, सुरक्षित और विकेंद्रीकृत करने पर केंद्रित था।

कूटनीति से ही निकलेगा युद्ध का समाधान - जयशंकर

तीनों सत्रों के मुख्य निष्कर्षों पर विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय दो बड़े और विनाशकारी युद्धों से जूझ रही है, जिनके गंभीर वैश्विक परिणाम हर देश महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास और वर्तमान समय, दोनों ही यह दिखाते हैं कि बड़े पैमाने के संघर्षों को सैन्य तरीकों से हल नहीं किया जा सकता। वैश्विक समुदाय को हर हाल में कूटनीतिक माध्यमों और बातचीत के जरिए शांति का रास्ता खोजना चाहिए।

डॉ. जयशंकर ने बताया कि इन युद्धों का सबसे बुरा असर ग्लोबल साउथ पर पड़ रहा है, जहां की आबादी को ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि G20 जैसे प्रभावशाली आर्थिक मंच को इस संकट को आधिकारिक तौर पर स्वीकार करना चाहिए और ठोस कदम उठाने चाहिए।

सप्लाई चेन को हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए - जयशंकर

सप्लाई चेन पर आयोजित एक सत्र के दौरान भारत का पक्ष रखते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया को किसी एक भौगोलिक क्षेत्र या कुछ चुनिंदा देशों पर अधिक निर्भर रहने के जोखिमों से बाहर निकलना होगा। उन्होंने कहा कि चाहे कोविड-19 जैसी महामारी हो, भू-राजनीतिक संघर्ष हों या क्लाइमेट चेंज से जुड़ी आपदाएं हों, एक ही जगह पर प्रोडक्शन सिस्टम का बहुत ज्यादा जमा होना ग्लोबल इकॉनमी को कमजोर कर सकता है।

जयशंकर ने कहा कि सभी देशों को सप्लाई चेन को राजनीतिक हथियार या दबाव डालने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। सप्लाई चेन को हथियार बनने से रोकने का सबसे प्रभावी तरीका यह है कि उत्पादन और विनिर्माण केंद्रों को दुनिया भर में फैलाया जाए।

दिसंबर शिखर सम्मेलन में आम सहमति की संभावना

दिसंबर में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन में एक संयुक्त बयान पर आम सहमति बनने की संभावना को लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि बातचीत का दायरा अभी उस अंतिम मुकाम तक नहीं पहुंचा है, लेकिन जैसे-जैसे सम्मेलन की तारीख करीब आएगी एक साझा दस्तावेज तैयार करने के प्रयास तेज हो जाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सभी देश मिलकर सकारात्मक रुख अपनाएं, तो आम सहमति तक पहुंचना पूरी तरह से संभव है।

ब्रिक्स (BRICS) का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी अलग-अलग दृष्टिकोण वाले देशों के बीच साझा सहमति बनी थी और भारत G20 में भी सर्वसम्मति बनाने के हर ईमानदार प्रयास का पूरा समर्थन करेगा।

Updated on:
1 Nov 2026, 9:35 AM IST
Published on: