
BJP में शामिल 2 नए MLC की सदस्यता पर सवाल (फ़ोटो- X@iKumarSaurabh)
Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की सियासत में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तिरहुत स्नातक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर शानदार जीत दर्ज करने वाले दो नवनिर्वाचित विधान पार्षदों (MLC) ने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। 31 अक्टूबर को पटना में BJP के प्रदेश मुख्यालय में तिरहुत से निर्वाचित बंशीधर ब्रजवासी और सारण से निर्वाचित डॉ. राहुल राज ने औपचारिक रूप से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। जिसे लेकर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने दोनों नवनिर्वाचित एमएलसी की सदस्यता रद्द करने की मांग उठा दी है।
जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ सिंह ने इस पूरे मामले पर प्रातिक्रिया देते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता के साथ किया गया एक क्रूर और भद्दा मजाक करार दिया।
उन्होंने कहा कि अपने चुनाव प्रचार के दौरान दोनों उम्मीदवारों ने खुद को किसी भी राजनीतिक दल से पूरी तरह अलग रखा था और निर्दलीय के तौर पर जनता से समर्थन मांगा था। मतदाताओं ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें निर्दलीय प्रतिनिधि के रूप में चुना, लेकिन अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर वे एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल में शामिल हो गए।
जन सुराज का कहना है कि यह न केवल जनता के जनादेश के साथ एक नैतिक विश्वासघात है, बल्कि कानूनी और संवैधानिक दृष्टिकोण से भी पूरी तरह से अवैध है।
जन सुराज ने अपने रुख को मजबूत करने के लिए संविधान की दसवीं अनुसूची और अनुच्छेद 102(2) तथा 191(2) के कानूनी प्रावधानों को जिक्र किया है। भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची में सदन के सदस्यों को दल-बदल के आधार पर अयोग्य ठहराने से जुड़े प्रावधान दिए गए हैं। इस प्रावधान के पैराग्राफ 2(2) के अनुसार, यदि कोई सदस्य निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुना जाता है और बाद में किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है, तो उसे सदन के सदस्य के रूप में अयोग्य ठहराया जा सकता है। यह प्रावधान संसद और राज्य विधानमंडल दोनों के सदस्यों पर लागू होता है। संविधान के अनुच्छेद 102(2) और 191(2) दल-बदल के आधार पर अयोग्यता से संबंधित हैं।
जन सुराज ने कहा है कि वह इस मामले को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि इसे इसके अंतिम कानूनी निष्कर्ष तक ले जाएगा। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के अनुसार, विधान परिषद के सभापति के समक्ष अयोग्यता के लिए एक औपचारिक याचिका दायर की जाएगी, क्योंकि सदन के सदस्यों की पात्रता या अयोग्यता तय करने का मुख्य कानूनी अधिकार सभापति के पास होता है। इसके अलावा, चुनाव प्रक्रिया के उल्लंघन के संबंध में भारत निर्वाचन आयोग को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा।
जन सुराज ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि विधायी मंच के भीतर कार्यवाही में बाधा डालने या मामले को दबाने का कोई प्रयास किया जाता है, तो पार्टी संविधान के प्रावधानों को बनाए रखने के लिए सीधे पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।
Updated on:
1 Nov 2026, 8:46 AM IST
Published on:
1 Nov 2026, 8:46 AM IST
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