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Panchkula School Incident: दो शिक्षिकाओं पर गिरी गाज, बाल सुरक्षा में चूक की अब होगी परत-दर-परत जांच

JBT Teacher Suspended: एक बच्ची के साथ स्कूल परिसर में हुई घटना ने पूरे शिक्षा महकमे को कटघरे में ला खड़ा किया है। सवाल सिर्फ घटना का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का भी है जहां अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित मानकर भेजते हैं।
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Panchkula School Incident

Panchkula School Incident: क्लासरूम में बच्ची पर हमले से हड़कंप, दो शिक्षिकाओं के निलंबन के बाद अब तय होगी जवाबदेही (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Panchkula Teacher Suspension: हरियाणा के पंचकूला में सरकारी स्कूल के अंदर छह साल की बच्ची के साथ मारपीट की घटना ने सभी को झुंझला दिया है। बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं, और शिक्षा विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत दो JBT शिक्षिकाओं को सस्पेंड कर दिया। हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी दखल दिया, और स्कूल के पूरे मामले की डिटेल रिपोर्ट मांग ली है। अब जांच का फोकस स्कूल की निगरानी और शिक्षकों की जिम्मेदारी पर आ गया है।

सेक्टर-20 के सरकारी संस्कृत प्राइमरी स्कूल में 31 अक्टूबर 2026 को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने दो अलग-अलग आदेश जारी किए। इसमें JBT शिक्षिकाएं - सिमरनजीत कौर (आईडी 2007143) और पूजा रानी (आईडी 2000845) को हरियाणा सिविल सेवा नियम के तहत तुरंत सस्पेंड कर दिया गया। सस्पेंड रहते हुए दोनों को पंचकूला जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के दफ्तर में ही रहना होगा, और बिना परमिशन वहां से जा नहीं सकतीं। नियम के मुताबिक उन्हें भत्ता और बाकी अनुमन्य लाभ भी मिलेंगे।

Panchkula School Incident: 28 अक्टूबर की घटना ने बढ़ाई चिंता

मामला 28 अक्टूबर का है। जानकारी के अनुसार, सरकारी स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले करीब आठ वर्षीय छात्र पर किंडरगार्टन की छह वर्षीय बच्ची के साथ मारपीट करने का आरोप है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, बच्ची पर ईंट, पत्थर और गमले जैसी वस्तुओं से हमला किया गया था। वह गंभीर रूप से घायल हो गई और उसे इलाज के लिए चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर में भर्ती कराना पड़ा।

पंचकूला की पुलिस उपायुक्त अदिति सिंह ने बताया कि बच्ची अब खतरे से बाहर है। पुलिस ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ कथित लापरवाही के संबंध में मामला भी दर्ज किया है।

बाल आयोग ने मांगा नौ बिंदुओं पर जवाब

हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (HSCPCR) ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी, पंचकूला को विस्तृत और बिंदुवार तथ्यात्मक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। आयोग की अध्यक्ष तृप्ति की ओर से जारी नोटिस में घटना के समय, स्थान और परिस्थितियों से लेकर बच्चों की जानकारी तक मांगी गई है।

आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि घटना के समय किन शिक्षकों और कर्मचारियों की ड्यूटी बच्चों की देखरेख के लिए लगाई गई थी। संबंधित कक्षा में निगरानी की जिम्मेदारी किसके पास थी और घटना के बाद बच्ची को प्राथमिक उपचार, अस्पताल पहुंचाने तथा अभिभावकों को सूचना देने के लिए क्या कदम उठाए गए, इसका भी विवरण मांगा गया है।

इसके अलावा मेडिकल उपचार, जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई, विभागीय जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रस्तावित सुरक्षा उपायों की जानकारी देने को कहा गया है। ड्यूटी रोस्टर, उपस्थिति रजिस्टर, उपलब्ध CCTV फुटेज और घटना से जुड़े अन्य दस्तावेज भी रिपोर्ट के साथ प्रस्तुत करने होंगे।

अब स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर उठेंगे सवाल

31 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह मामला स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए तथ्यात्मक रिपोर्ट और कार्रवाई की जानकारी प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जाए।

इस पूरे प्रकरण ने स्कूलों में केवल शिक्षकों की नियुक्ति ही नहीं, बल्कि उनकी जिम्मेदारियों के प्रभावी निर्वहन पर भी बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए नियमित निगरानी, स्पष्ट ड्यूटी निर्धारण, सुरक्षित आवाजाही और CCTV व्यवस्था की निरंतर निगरानी बेहद जरूरी है।

स्कूल परिसर में कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है, जब तक उनकी निगरानी करने वाला जिम्मेदार कर्मचारी भी मौजूद न हो। साथ ही, बच्चों के व्यवहार में असामान्य आक्रामकता दिखाई देने पर समय रहते काउंसलिंग और अभिभावकों से संवाद भी जरूरी है।

फिलहाल दो शिक्षिकाओं का निलंबन विभागीय कार्रवाई का हिस्सा है। इससे किसी की अंतिम जिम्मेदारी या दोष स्वतः सिद्ध नहीं होता। जांच के निष्कर्ष ही यह स्पष्ट करेंगे कि घटना के समय निगरानी में कहां चूक हुई और भविष्य में मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किन स्तरों पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

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