Gen-Z Consumption Behaviour: Gen-Z का उपभोग व्यवहार बदल रहा है। क्या है पूरा मामला? आइए जानते हैं।
दुनिया भर में Gen-Z उपभोग के मामले में पूरी तरह बदलाव ला रही है। जहाँ पुरानी पीढ़ियाँ 'खर्च करो और जियो' के सिद्धांत पर चलती थीं, वहीं Gen-Z सोच-समझकर, वैल्यू-ड्रिवन और ज़रूरत-आधारित खर्च पर फोकस कर रही है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार यह पीढ़ी आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और जॉब मार्केट की अस्थिरता से प्रभावित होकर स्मार्ट कंज़्यूमर बन गई है। महंगाई, अनिश्चित नौकरियां और जीवन-यापन की बढ़ती लागत ने उन्हें सतर्क बना दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार Gen-Z कम मात्रा में चीज़ें खरीदते हैं, बजट बनाते हैं और बचत को प्राथमिकता देते हैं। कई Gen-Z फाइनेंशियल सिक्योरिटी को सबसे ऊपर रखते हैं, ट्रेडिशनल माइलस्टोन्स (शादी, बच्चे) से ज़्यादा करियर और वेल्थ पर फोकस करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार Gen-Z में 'स्प्लर्ज' (बिना सोचे बड़े खर्च) की प्रवृत्ति घटी है। वो ब्रांड, ट्रेंड या सोशल मीडिया प्रभाव से ज़्यादा कीमत, गुणवत्ता और उपयोगिता देखते हैं। रिपोर्ट के अनुसार Gen-Z डिस्काउंट, प्राइवेट लेबल, सेकंड-हैंड और किफायती विकल्प चुन रहे हैं। भारत में 85% Gen-Z वाले कैटेगरी में स्प्लर्ज करने को तैयार हैं, लेकिन सिर्फ उनमें जहाँ सही वैल्यू मिले। Gen-Z 'वैल्यू-फॉर-मनी' चाहते हैं, न कि सिर्फ सस्ती चीज़ेँ। मिनिमलिस्ट लिविंग मजबूत हो रहा है। यानी कम चीजें, ज्यादा सुकून। ये लोग अनुभवों (यात्रा, स्किल लर्निंग) को सामान से ज़्यादा महत्व देते हैं। सेकंड-हैंड, री-कॉमर्स और सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी है, क्योंकि वो पर्यावरण और लॉन्ग-टर्म यूज़ को ध्यान में रखते हैं।
डिजिटल-फर्स्ट होने के बावजूद Gen-Z रिसर्च, रिव्यू और प्राइस ट्रैकिंग से निर्णय लेते हैं। 'इंस्टेंट बाय' की जगह 'रिसर्च-एंड-बाय' कल्चर बढ़ा है। भारत में शहरी Gen-Z बजट-बेस्ड खर्च, सेकंड-हैंड मार्केट और किराए की सेवाओं की ओर झुक रही है। यह बदलाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। कंपनियाँ वैल्यू-ड्रिवन, सस्टेनेबल और बजट-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स ला रही हैं। Gen-Z का यह ट्रेंड स्मार्ट, जिम्मेदार और फ्यूचर-ओरिएंटेड उपभोग की दिशा दिखाता है।