Gig Workers To Get Pension: ऑनलाइन उपभोक्ता सेवाएं दे रही एग्रिगेटर कंपनियां के प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे एक करोड़ से अधिक गिर्ग वर्कर्स को ईपीएफओ पेंशन सुविधा के दायरे में लाया जाएगा।
Gig Workers To Get Pension: ऑनलाइन उपभोक्ता सेवाएं दे रही एग्रिगेटर कंपनियां के प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे एक करोड़ से अधिक गिर्ग वर्कर्स को ईपीएफओ पेंशन सुविधा के दायरे में लाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक श्रम मंत्रालय ने गिर्ग वर्कर्स को ईपीएफओ पेंशन सुविधा देने के प्रस्ताव का मसौदा लगभग तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। बिना किसी सामाजिक सुरक्षा कवच के काम कर रहे गिग वर्कर्स को पेंशन देने के लिए एग्रिगेटर कंपनियों से एक न्यूनतम अंशदान लिया जाएगा। इसके लिए उनके हर बिलिंग लेन-देन से दो या तीन प्रतिशत राशि पेंशन अंशदान के लिए ली जाएगी।
गिग वर्कर्स को एक यूनिवर्सल अकांउट नंबर (यूएएन) जारी किया जाएगा, जिसमें दो-तीन एग्रिगेटर कंपनियों के लिए किए काम करते हुए एक ही खाते में सबका पेंशन अंशदान हासिल कर सकेगा। उदाहरण के लिए, नई योजना के तहत, अगर जोमैटो और रैपिडो के साथ काम करने वाला कोई कर्मचारी क्रमश: 10,000 रुपए और 12,000 रुपए कमाता है, तो उन्हें प्रत्येक एग्रीगेटर से पेंशन फंड योगदान मिलेगा।
सूत्रों ने कहा कि गिर्ग वर्कर्स के पेंशन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर श्रम मंत्रालय ने जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर जैसी तमाम बड़ी एग्रिगेटर कंपनियों से चर्चा कर उनको सामाजिक सुरक्षा के लिए अंशदान करने की मंजूरी ले ली है। पिछले सप्ताह आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया था कि भारत का गिग कार्यबल 2030 तक 23.5 मिलियन तक पहुंच जाएगा।
मालूम हो कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में ई-श्रम पोर्टल पर गिग वर्कर्स का पंजीकरण करने की सुविधा देने तथा उन्हें पहचान पत्र प्रदान करने की घोषणा की थी। बजट में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गिग श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य कवरेज की घोषणा भी की गई थी।
सरकार का मानना है कि गिग वर्कर्स की आय इतनी नहीं है कि अंशदान के लिए उनकी आय से राशि काटी जाए। इसलिए प्रस्ताव है कि कंपनियां हर लेन-देन पर पेंशन अंशदान वैसे ही काटेंगी, जैसे बिल में जीएसटी काटा जाता है।