
गोवा में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने वोटर लिस्ट से हटाए गए छह लोगों के नाम दोबारा शामिल करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों को इन सभी मतदाताओं के निवास की पुष्टि करने के बाद 10 दिनों के भीतर उनके नाम मतदाता सूची में जोड़ने होंगे।
इस मामले में चार दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने यह फैसला सुनाया। जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने चुनाव आयोग की दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं को राहत दी जाती है और उनके नाम मतदाता सूची में दोबारा शामिल किए जाने चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर की वैधता पर चल रही सुनवाई के फैसले तक लंबित रखने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील गौरिश अग्नि ने आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इससे इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मतदाताओं के नाम सूची में शामिल करने के आदेश पर रोक कैसे लगाई जा सकती है? अगर चुनाव आयोग को राहत चाहिए तो वह सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की उस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए, जिसके तहत फॉर्म 8 के जरिए पते में बदलाव करने के आवेदन अपने आप खारिज हो रहे थे।
कोर्ट ने कहा कि अगर कोई मतदाता अपना घर बदलकर दूसरी जगह चला गया है तो उसे पुराने पते पर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर करना गलत है। इससे मतदाता ऐसी घोषणा करने के लिए मजबूर हो सकता है, जो सही नहीं है।
अदालत ने यह भी पूछा कि अगर किसी व्यक्ति का पता बदल गया है और उसका फॉर्म 8 आवेदन खारिज कर दिया जाता है, तो उसके पास क्या विकल्प बचता है?
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील अशुतोष कुंभकोणी ने दलील दी कि एसआईआर के दौरान नई मतदाता सूची पूरी तरह नए सिरे से तैयार की जाती है। इसमें पुरानी सूची के नाम अपने आप शामिल नहीं होते।
उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं किया, उनका नाम नई ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हुआ। ऐसे लोगों को फॉर्म 8 के जरिए पुराने रिकॉर्ड में बदलाव करने के बजाय दावे और आपत्तियों की अवधि में फॉर्म 6 भरकर नए सिरे से पंजीकरण कराना चाहिए।
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से सुनवाई टालने की मांग भी की थी। हालांकि, गोवा पीठ ने माना कि यहां मामला अलग है, क्योंकि राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।