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कचरे से सोना: पारंपरिक रसायनों का नहीं, बल्कि एआइ से डिजाइन बैक्टीरिया का इस्तेमाल

भारत ने बैटरी कचरे से लिथियम निकालने के लिए AI-डिजाइन बैक्टीरिया विकसित कर लिया है। बेंगलुरु की एट्रिया यूनिवर्सिटी और स्टार्टअप मिनीमाइन्स का अनोखा प्रोजेक्ट चीन पर निर्भरता कम करेगा और पर्यावरण को भी बचाएगा।
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Jul 18, 2026
Lithium
बैटरियों से निकाला जाएगा लिथियम (फोटो- AI)

भारत ने भविष्य के ईंधन यानी लिथियम के लिए विदेशों और विशेषकर चीन पर अपनी आयात निर्भरता को कम करने का एक बेहद अनोखा और क्रांतिकारी तोड़ निकाल लिया है। अब देश में पुरानी और बेकार हो चुकी बैटरियों से लिथियम निकालने के लिए पारंपरिक रसायनों का नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से डिजाइन किए गए बैक्टीरिया यानी माइक्रोब्स का इस्तेमाल किया जाएगा।

ये बैक्टीरिया पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना बैटरी कचरे से लिथियम सोख लेंगे। बेंगलूरु की एट्रिया यूनिवर्सिटी इस तकनीक को मिनीमाइन्स क्लीनटेक सॉल्यूशंस स्टार्टअप के साथ मिलकर विकसित कर रही है। आज का 'वाइट गोल्ड' लिथियम को 'वाइट गोल्ड' कहा जाता है। स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक कारों तक, हर जगह लिथियम बैटरी का ही राज है।

'एआइ और बैक्टीरिया' का फॉर्मूला

पारंपरिक रीसाइक्लिंग में इस्तेमाल होने वाले हैवी केमिकल्स से बैटरियों के कई मूल्यवान तत्व नष्ट हो जाते हैं। समस्या को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक सिंथेटिक बायोलॉजी और एआइ की जुगलबंदी कर रहे हैं। पारंपरिक जैविक प्रयोगों में सही बैक्टीरिया की पहचान करने में बरसों लग जाते थे। अब एआइ चुटकियों में ऐसे 'सुपर माइक्रोब्स' की पहचान और उन्हें डिजाइन करने में मदद करेगा, जो बैटरी से धातु को अलग कर सकें।

भारत के लिए इसलिए गेम-चेंजर

  1. भारत अभी लिथियम आयात के लिए विदेशों पर निर्भर है। खनन के नए प्रोजेक्ट धरातल पर उतारने में सालों लग जाते हैं। ऐसे में पुरानी बैटरियों को रीसायकल करना सबसे तेज और सस्ता रास्ता है।

2. यह अनूठा प्रोजेक्ट भारत सरकार की बायोटेक्नोलॉजी आधारित विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नीति 'बायो ई—3' और 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन' के उद्देश्यों के साथ सीधे तौर पर मेल खाता है।

शुरुआत में इन पर रहेगा फोकस

शुरुआती चरण में शोधकर्ता लिथियम आयरन फॉस्फेट (एलएफपी) बैटरियों को टारगेट कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में सबसे ज्यादा होता है। इस तकनीक से न केवल शुद्ध लिथियम मिलेगा, बल्कि बहुमूल्य 'हाई-ग्रेड आयरन फॉस्फेट' भी सुरक्षित बच जाएगा।

Updated on:
18 Jul 2026 08:24 am
Published on:
18 Jul 2026 08:24 am