
गृह मंत्रालय ने नियमों के अनुपालन को सरल बनाने और प्रक्रियाओं में अधिक स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 'इमिग्रेशन और विदेशी (संशोधन) नियम, 2026' अधिसूचित किए हैं। इन संशोधित नियमों में पंजीकरण की समय-सीमा, आपातकालीन प्रावधानों तथा डिजिटल अपील व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। सोमवार देर रात जारी आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, ये संशोधन 'इमिग्रेशन और विदेशी अधिनियम, 2025' की धारा 30 के अंतर्गत किए गए हैं और इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
सरकार द्वारा संशोधन के तहत किए गए बदलावों में सबसे सबसे अहम बदलाव भारत में रह रहे विदेशियों के पंजीकरण से जुड़ी ज़रूरतों से संबंधित है। संशोधित नियमों के तहत अब कोई भी व्यक्ति देश में अपने आगमन के 180 दिनों की अवधि खत्म होने से पहले किसी भी समय अपना पंजीकरण पूरा कर सकता है। पहले 180 दिनों की समय-अवधि लहटँ होने के बाद 14 दिनों के अंदर रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य था।
सरकार ने इसके साथ ही देर से रजिस्ट्रेशन करवाने वालों के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है। संशोधन में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि निर्धारित समय-सीमा के बाद रजिस्ट्रेशन की अनुमति अब सिर्फ आपातकालीन परिस्थितियों में ही दी जाएगी। यह कदम नियमों का पालन न करने वालों के प्रति सरकार के सख्त रवैये को दर्शाता है, लेकिन साथ ही वास्तविक मामलों में कुछ लचीलापन भी बनाए रखता है।
इन नियमों में बच्चों और उनकी नागरिकता की स्थिति से संबंधित कुछ अहम स्पष्टीकरण भी शामिल किए गए हैं। अधिसूचना के अनुसार उन मामलों में रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं होगी जहाँ माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो और वह 'नागरिकता अधिनियम, 1955' के तहत अपने बच्चे की भारतीय नागरिकता को बनाए रखना चाहता हो। इसके अलावा ऐसे मामलों में जब किसी बच्चे को भारत में रहते हुए किसी विदेशी देश की नागरिकता मिल जाती है, तो संशोधित नियमों के तहत माता-पिता में से किसी एक के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह ऐसी नागरिकता प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन ऑफिसर को इसकी सूचना दे।
कुछ विशिष्ट प्रावधानों के तहत रिपोर्टिंग की समय-सीमा में भी बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब 24 घंटे की सख्त समय-सीमा के भीतर पालन ज़रूरी होगा।
नियमों में संशोधन के तहत पूरी तरह से डिजिटल माध्यम पर आधारित अपील प्रक्रिया भी शुरू की गई है। अधिकारियों द्वारा जारी किए गए किसी भी निर्देश से असंतुष्ट व्यक्ति अब एक निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए 30 दिनों के भीतर 'ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन' के आयुक्त के सामने अपनी अपील दायर कर सकते हैं।