
कर्नाटक में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर हलचल तेज (Photo-ians)
Karnataka Politics: कर्नाटक में काफी समय से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही खींचतान आखिरकार खत्म हो गई है। बुधवार को डीके शिवकुमार सीएम पद की शपथ लेंगे। इसके बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। दरअसल, डीके शिवकुमार के सीएम बनने के बाद प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली हो जाएगा। इसके लिए कई दिग्गज नेताओं के नाम पर चर्चा चल रही है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सिद्धारमैया अपने करीबी माने जाने वाले पूर्व मंत्री सतीश जारकीहोली को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के पक्ष में नहीं हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने एमएलसी बीके हरिप्रसाद, पूर्व मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर और शिवराज तंगडागी जैसे AHINDA (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) समुदायों से आने वाले नेताओं के नाम आगे बढ़ाए हैं।
हालांकि कांग्रेस आलाकमान पहले सतीश जारकीहोली के नाम पर विचार कर रहा था, लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि सतीश ने प्रदेश अध्यक्ष पद के साथ मंत्री पद की भी मांग की है, जिसे हाईकमान स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
इस बीच छह बार के विधायक अप्पाजी सीएस नाडागौड़ा और पूर्व मंत्री ईश्वर खंड्रे के नाम भी सामने आए हैं। वीरशैव लिंगायत समुदाय से आने वाले नाडागौड़ा को इस दौड़ का डार्क हॉर्स माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद का नाम भी प्रदेश अध्यक्ष की रेस में चल रहा है। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय को साधने की रणनीति के तहत उनके नाम पर गंभीरता से विचार हो रहा है। संगठन में लंबे अनुभव और शीर्ष नेतृत्व से करीबी रिश्ते उनके पक्ष में माने जा रहे हैं।
वहीं वरिष्ठ मंत्री एमबी पाटिल का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल है। लिंगायत समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ और पार्टी में प्रभावशाली भूमिका उन्हें इस दौड़ में अहम बनाती है। शिवराज तंगडागी ने भी प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी जताई है।
बता दें कि सिद्धारमैया और सतीश जारकीहोली के बीच मतभेद काफी पहले से चल रहे थे। बताया जाता है कि सिद्धारमैया के बेटे और एमएलसी डॉ. यतींद्र की दखलअंदाजी को लेकर सतीश नाराज थे, खासकर जब वे लोक निर्माण विभाग मंत्री थे।
राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज होने के दौरान सतीश जारकीहोली ने डीके शिवकुमार, उनके भाई डीके सुरेश और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से भी कई दौर की बातचीत की थी। वहीं 26 मई को जब सिद्धारमैया और परमेश्वर दिल्ली के लिए रवाना हुए, तब सतीश और जमीर अहमद खान उनके साथ नहीं गए। इसके बाद मतभेद को लेकर चल रही अटकलों को और ज्यादा बल मिला।
पार्टी सूत्रों का मानना है कि AHINDA वोट बैंक में संभावित असंतोष को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व अब संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। आलाकमान चाहता है कि भविष्य में कोई एक नेता इस सामाजिक समीकरण पर पूरी तरह दावा न कर सके और यह संदेश जाए कि AHINDA समुदायों का प्रतिनिधित्व पूरी पार्टी की प्राथमिकता है।
Updated on:
2 Jun 2026, 10:38 AM IST
Published on:
2 Jun 2026, 10:38 AM IST
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