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Karnataka Politics: सीएम के बाद भी डीके शिवकुमार की मुश्किलें नहीं होगी कम, पुराने केस से कैसे पार पाएंगे

Karnataka New CM DK Shivakumar: कर्नाटक में सिद्धारमैया के इस्तीफा देने के बाद डीके शिवकुमार को नेता चुना गया है। हालांकि सीएम बनने के बाद पुराने केस शिवकुमार के लिए चुनौती बने रहेंगे।

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Karnataka Leadership Change

CM बनने के बाद डीके शिवकुमार के लिए पुराने केस बने रहेंगे चुनौती (Photo-IANS)

Karnataka Politics: कर्नाटक में कांग्रेस ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान खत्म कर दी। सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार को विधायक दल का नेता चुना गया। डीके शिवकुमार 3 जून को सीएम पद की शपथ ले सकते हैं।

पुराने केस बनेंगे चुनौती

सीएम बनने के बाद भी डीके शिवकुमार की मुश्किलें कम नहीं होगी, क्योंकि इसके पीछे उनके पुराने लंबित केस हैं। आयकर जांच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मनी लॉन्ड्रिंग जांच और सीबीआई की आय से अधिक संपत्ति मामले जैसी कई जांचों का सामना कर चुके शिवकुमार को अब तक अदालतों से राहत मिलती रही है और किसी भी प्रमुख मामले में दोषसिद्धि नहीं हुई है। इसके बावजूद विपक्ष इन मामलों को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है।

विपक्ष ने साधा निशाना

इसको लेकर विपक्ष के नेता चलवाड़ी नारायणस्वामी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कुछ दल आरोपपत्र दाखिल होने पर टिकट तक नहीं देते, लेकिन कांग्रेस ने जमानत पर चल रहे नेता को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है।

वहीं वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए ED और CBI का हथियार की तरह उपयोग किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों ने क्या कहा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवकुमार को दो स्तरों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। केंद्र में बीजेपी सरकार होने के कारण कानूनी प्रक्रियाएं उनके लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं, जबकि राज्य स्तर पर भाजपा की आंतरिक खींचतान कांग्रेस सरकार के खिलाफ उसके अभियान को कमजोर कर सकती है।

उनका कहना है कि शुरुआत में बीजेपी शिवकुमार के कानूनी मामलों को ज्यादा आक्रामक तरीके से नहीं उठाएगी, लेकिन सत्ता परिवर्तन का दौर स्थिर होने के बाद यह मुद्दा राज्य की राजनीति में प्रमुख स्थान ले सकता है।

कर्नाटक की राजनीति में ऐसे उदाहरण पहले भी देखने को मिले हैं। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को 2011 में अवैध खनन और भूमि आवंटन से जुड़े आरोपों के बीच पद छोड़ना पड़ा था। वहीं सिद्धारमैया भी MUDA विवाद से जुड़े कानूनी विवादों के बावजूद मुख्यमंत्री पद पर बने रहे।