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गुजरात में पास हुआ यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल, उत्तराखंड के बाद बना दूसरा राज्य

उत्तराखंड के बाद अब एक और राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पास हो गया है। हम बात कर रहे हैं गुजरात की।
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Mar 25, 2026
Union Civil Code
Union Civil Code (Representational Photo)

गुजरात (Gujarat) में भी यूनिफॉर्म सिविल कोड - यूसीसी (Uniform Civil Code - UCC) बिल पास हो गया है। उत्तराखंड (Uttrakhand) के बाद गुजरात ऐसा करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) ने मंगलवार को राज्य की विधानसभा द्वारा यूसीसी बिल 2026 को पारित किए जाने को गुजरात और देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। यह बिल साढ़े सात घंटे से ज़्यादा चली बहस के बाद पारित हुआ, जो बहुमत से कानून को मंज़ूरी मिलने के साथ समाप्त हुई।

हो सकते हैं ये बदलाव

यूसीसी के लागू होने से गुजरात में कई बदलाव हो सकते हैं। इससे राज्य में शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशन का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी होगा। बहुविवाह (एक से ज़्यादा शादी) पर रोक लगेगी। महिलाओं को संपत्ति में बराबर हक मिलेगा। सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू होगा। हलाला जैसी प्रथाओं पर रोक लगाई जाएगी। विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों के लिए सभी धर्मों और समुदायों में एक समान कानूनी ढांचा लागू होगा। यूसीसी यह सुनिश्चित करेगा कि सभी धर्मों और समुदायों की महिलाओं को समान अधिकार मिलें, जिससे उनकी गरिमा और सुरक्षा मज़बूत होगी।

संस्कृति को नहीं होगा नुकसान

सांस्कृतिक प्रभावों को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर सीएम पटेल ने साफ कर दिया कि यूसीसी किसी संस्कृति को मिटाने के लिए नहीं है। इस बिल से किसी समुदाय की संस्कृति को नुकसान नहीं पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि राज्य की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखा गया है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी समुदाय के साथ अन्याय न हो।

जनता से लगभग 20 लाख सुझाव हुए प्राप्त

विधानसभा में बहस के दौरान डिप्टी सीएम हर्ष संघवी (Harsh Sanghavi) ने कहा कि समिति को यूसीसी के संबंध में डाक, ईमेल, वेब पोर्टल और व्यक्तिगत परामर्श के माध्यम से जनता से लगभग 20 लाख सुझाव प्राप्त हुए थे। उन्होंने कहा, "49% प्रतिक्रियाएं या लगभग 9.72 लाख ईमेल के माध्यम से प्राप्त हुईं और 5.5% या लगभग 1.09 लाख वेब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त हुईं। ज़्यादातर लोग एक जैसे प्रावधानों के पक्ष में थे, जिनमें 81% लोग शादी के एक जैसे कानूनों के पक्ष में, 79% लोग तलाक़ के एक जैसे नियमों के पक्ष में, 83% लोग संपत्ति के बराबर अधिकारों और गुज़ारा भत्ता के प्रावधानों के पक्ष में और 86% लोग तलाक़ के अनिवार्य पंजीकरण के पक्ष में थे।"

Updated on:
25 Mar 2026 07:50 am
Published on:
25 Mar 2026 07:34 am