
Farmers Movement: देश में इस समय लगातार कई बड़े आंदोलन और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। इसी बीच हरियाणा से किसानों के द्वारा आंदोलन करने की खबर सामने आ रही है। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम मिलने और खरीद में आ रही परेशानियों के खिलाफ किसान संगठन 14 अक्टूबर को हरियाणा में प्रदर्शन करेंगे। धान और बाजरे की खरीद में कथित गड़बड़ियों, फसल बेचने पर लगाई जा रही शर्तों और भुगतान से कटौती के मुद्दे पर किसान संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन करने का फैसला किया है।
हरियाणा के नरवाना में शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा और हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा की बैठक हुई। इसमें दोनों संगठनों से जुड़े 23 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में फैसला लिया गया कि 14 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक सभी जिलों में मंडी समिति कार्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा।
इस दौरान कार्यालयों में तालाबंदी भी की जाएगी। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शन के बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो उसी दिन आंदोलन के अगले चरण को लेकर बड़े फैसले किए जाएंगे।
किसान नेताओं ने कहा कि धान की खरीद के मौजूदा सीजन में किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। धान और बाजरे की खरीद पर प्रति एकड़ सीमा तय करने, जिलों के हिसाब से पाबंदियां लगाने और ऑनलाइन पोर्टल में बार-बार आने वाली दिक्कतों के कारण किसानों को परेशानी हो रही है।
उनका आरोप है कि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों में लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अलावा फसल के भुगतान से कथित तौर पर बिना अनुमति के पैसे काटे जा रहे हैं।
किसान संगठनों का आरोप है कि हरियाणा की मंडियों में धान और बाजरा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम पर खरीदा जा रहा है। किसान नेताओं के मुताबिक, धान का MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल और बाजरे का 2,900 रुपये प्रति क्विंटल है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार ने फसलों के दाम तय किए हैं, तो किसानों को उसी कीमत पर खरीद का लाभ क्यों नहीं मिल रहा है।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने कहा कि किसान दिन-रात मेहनत करके देश के लिए अनाज पैदा करते हैं, लेकिन फसल बेचने के समय उन्हें पाबंदियों और कम कीमतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि MSP घोषित करने का तभी मतलब है, जब किसानों को उनकी उपज का तय दाम मिले।