
Bishnoi Interview Case: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के विवादित इंटरव्यू मामले में पंजाब पुलिस के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) गुरशेर सिंह संधू की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। जस्टिस नमित कुमार की अदालत ने मंगलवार को दिए फैसले में संधू को सभी परिणामी लाभों के साथ बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह बहाली विभाग की उस विभागीय जांच को जारी रखने के अधिकार के अधीन है, जो संधू और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ पहले से लंबित है।
मामला मार्च 2023 का है, जब एक निजी टीवी चैनल ने जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के दो इंटरव्यू प्रसारित किए थे। इनमें से एक इंटरव्यू सितंबर 2022 में मोहाली के खरड़ स्थित सीआईए स्टाफ परिसर में पुलिस हिरासत के दौरान रिकॉर्ड किया गया था। हाईकोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने संधू पर इस इंटरव्यू की सुविधा उपलब्ध कराने का आरोप लगाया था। पंजाब सरकार ने 2 जनवरी 2025 को संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) का हवाला देते हुए नियमित विभागीय जांच के बिना ही उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था। सरकार का तर्क था कि अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे थे और आरोप पत्र प्राप्त करने से बच रहे थे।
संधू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बर्खास्तगी को चुनौती दी थी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें “बलि का बकरा” बनाया जा रहा है। अदालत ने पाया कि संधू ने पहले शो-कॉज नोटिस का जवाब दिया था, दस्तावेज मांगे थे और शुरुआती कार्यवाही में भाग लिया था। जस्टिस कुमार ने कहा कि मात्र गैर-सहयोग या आरोप पत्र न लेने को ऐसी परिस्थिति नहीं माना जा सकता, जिसमें जांच करना “उचित रूप से व्यावहारिक” न हो। अनुच्छेद 311(2)(बी) एक अपवाद है, न कि शॉर्टकट। सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि संवैधानिक मानकों पर खरी नहीं उतरी।
संधू 2016 बैच के पीपीएस अधिकारी हैं और पहले मोहाली में डीएसपी (डिटेक्टिव) के रूप में तैनात थे। अक्टूबर 2024 में उन्हें निलंबित किया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि बर्खास्तगी रद्द होने से विभागीय जांच प्रभावित नहीं होगी। यह फैसला पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई में उचित प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की याद दिलाता है।