
तेजस्वी यादव(फोटो-IANS)
Tejashwi Yadav on GDP Growth: राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने देश की GDP के आंकड़ों और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि असली विकास और जीडीपी में बढ़ोतरी प्रचार अभियानों, सोशल मीडिया रील्स या हेडलाइंस में नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन स्तर, उनकी आर्थिक स्थिति और उनके घर के बजट में दिखती है। उन्होंने केंद्र सरकार पर जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करते हुए आंकड़ों में हेरफेर करने का आरोप लगाया।
केंद्र सरकार के आर्थिक ढांचे पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि मौजूदा सिस्टम से सिर्फ कुछ खास लोगों को ही फायदा होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मॉडल से आबादी के ऊपरी 5 प्रतिशत लोगों को ही मुनाफा होता है, जबकि देश के 95 प्रतिशत नागरिक आर्थिक तंगी और नुकसान से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार कागजों पर राजकोषीय घाटे को संतुलित दिखाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के डिविडेंड का सहारा ले रही है और पहली बार केंद्रीय बैंक से ₹2,68,000 करोड़ जैसी भारी-भरकम राशि निकाली गई।
तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि रुपया अभी ऐतिहासिक गिरावट का सामना कर रहा है, रिकॉर्ड महंगाई आम परिवारों की कमर तोड़ रही है और बेरोजगारी दर 50 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास रोजगार के मौके नहीं हैं, लोग घर की ज़\रूरतों को पूरा करने के लिए लोन, EMI और कर्ज के सहारे गुज़ारा कर रहे हैं और छोटे-मंझोले कारोबार लगातार बंद हो रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवा बिना किसी ठोस नतीजे के अपनी जिंदगी के सबसे अच्छे साल बर्बाद कर रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर तेजस्वी यादव ने बताया कि देश में 8.7 करोड़ युवा शिक्षा व्यवस्था से बाहर हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले दशक में लगभग 94,000 स्कूल बंद हुए हैं, यानी हर दिन औसतन 26 स्कूल बंद हुए। इसके अलावा देश भर में लगभग 100,000 स्कूल सिर्फ एक टीचर के भरोसे चल रहे हैं। सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 12 साल तक सत्ता में रहने के बावजूद 85 करोड़ नागरिक आज भी अपना पेट भरने के लिए सरकार से मिलने वाले 5 किलो मुफ्त अनाज पर निर्भर हैं।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि कई अहम ग्लोबल इंडेक्स में भारत की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट (147 देशों में 116वां स्थान), ग्लोबल हंगर इंडेक्स (123 देशों में 102वां स्थान), वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स (180 देशों में 157वां स्थान) और एनवायरनमेंटल परफॉर्मेंस इंडेक्स (177 देशों में 176वां स्थान) की रैंकिंग का हवाला दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों से भारत का पीछे रहना नीतिगत स्तर पर बड़ी नाकामियों को दर्शाता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह खोखले दावों और मनगढ़ंत आंकड़ों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर वास्तविक काम करने पर ध्यान दे।
Updated on:
02 Sept 2026 09:36 pm
Published on:
02 Sept 2026 09:35 pm
